आखिर क्यों रखें रह गए भजिये, फिर ताकने लगे एक दूसरे का मुँह

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आखिर क्यों रखें रह गए भजिये, फिर ताकने लगे एक दूसरे का मुँह

बात सामान्य सी लगती हैं पर इसके पीछे की गहराई को समझना होगा, सागर में कुछ दिन से पत्रकार वार्ताओं का दौर तेज देखने मिल रहा हैं एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप का दौर भी तेज हुआ हैं इसी बीच अब पत्रकार वार्ताओं को आहूत किया जा रहा हैं दो दिन पहले की बात हैं बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में एक पत्रकार वार्ता कथित रूप से बुलाई गई गिनती के 4,5 पत्रकार ही पहुचे जबकि अहूतकर्ता ने भजिये बड़ी मात्रा में बनवा लिए थे अब वह डॉक्टर साहब एक डॉक्टर साहब से बोलते हैं यार पत्रकार तो आये नही भजिये रखे हैं रह गए !
दूसरा मामला एक निजी अस्पताल के डॉक्टर और उनसे जुड़े एक संगठन ने एक अच्छी खासी होटल में वार्ता आमंत्रित की वहां भी यही हाल देखने मिला 4,5 पत्रकार साथी ही पहुचे डिनर आदि रखा गया था
दोनो मामलों में कुछ बातें साफ देखने मिली अनियमित समय यानी आप पत्रकारों को अपने समय के मुताबिक आमंत्रित कर रहे हैं जबकि उनकी संस्थान और खबरो के समय का ख्याल नही रखा जा रहा, अचानक आहूत की जाने वाली वार्ता, एक दो पत्रकारों को सारी जवाबदारी सौपना जबकि उनकी जमात में क्या हिस्सेदारी (कम्युनिकेशन) है खीज का विषय हैं, इन सब बातों का ध्यान न रखना फिर भजिये रखें ही रह जाना हैं इस लिए ध्यान देने योग्य यह और अन्य भी बातें हैं।

नोट- बता दूँ में दोनो पत्रकार बैठकों में ससम्मान आमंत्रित था पर इन्ही सब कारणों से नही पहुच पाया – आपका गजेंद्र ठाकुर✍️

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