जिले में 30 मार्च से चना-मसूर की समर्थन मूल्य पर खरीदी शुरू, 28 मई तक चलेगा उपार्जन
सागर। मध्यप्रदेश शासन के निर्देशानुसार रबी विपणन वर्ष 2026-27 के अंतर्गत जिले में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर चना एवं मसूर की खरीदी का कार्य प्रारंभ हो गया है। कलेक्टर संदीप जी आर के मार्गदर्शन में यह प्रक्रिया 30 मार्च से शुरू होकर 28 मई 2026 तक निरंतर जारी रहेगी। शासन की नीति के अनुसार, केवल ई-उपार्जन पोर्टल पर पंजीकृत और सत्यापित किसानों से ही उनकी उपज का क्रय किया जाएगा।
स्लॉट बुकिंग और ई-उपार्जन व्यवस्था
किसानों की सुविधा के लिए ई-उपार्जन पोर्टल पर स्लॉट बुकिंग की अनिवार्य व्यवस्था की गई है। किसान स्वयं अपनी सुविधा अनुसार विक्रय की तिथि और केंद्र का चयन कर सकेंगे। उल्लेखनीय है कि एक किसान को अपनी संपूर्ण उपज के लिए एक ही बार में स्लॉट बुक करना होगा, जिसकी वैधता 7 कार्य दिवस रहेगी। केंद्रों पर भीड़ और अव्यवस्था रोकने के लिए आंशिक बुकिंग या केंद्र बदलने की अनुमति नहीं दी गई है।
केंद्रों पर बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य
खरीदी प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बरतने के लिए इस बार आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन को अनिवार्य किया गया है। ओटीपी आधारित सत्यापन मान्य नहीं होगा। उपार्जन केंद्रों पर किसानों को आधार कार्ड, बैंक पासबुक, समग्र आईडी, पंजीयन प्रिंट और खसरा जैसे आवश्यक दस्तावेज साथ लाना अनिवार्य है। केंद्रों का संचालन सोमवार से शुक्रवार, सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक किया जाएगा, जबकि तौल पर्ची शाम 6 बजे तक ही जारी की जाएगी।
गुणवत्ता जांच और भुगतान प्रक्रिया
उपार्जन केंद्रों पर केवल FAQ (उत्तम औसत गुणवत्ता) श्रेणी की उपज ही स्वीकार की जाएगी। गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए केंद्रों पर नमी मापक यंत्र और सफाई के उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। खरीदी गई उपज का भुगतान सीधे किसानों के सक्रिय बैंक खातों में जेआईटी पोर्टल के माध्यम से किया जाएगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जनधन या निष्क्रिय खातों में भुगतान संभव नहीं होगा, इसलिए किसान अपने खाते सक्रिय रखें।
केंद्रों पर पुख्ता इंतजाम
जिले के सभी विकासखंडों (सागर, राहतगढ़, बंडा, बीना, देवरी, रहली आदि) में प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों और एफपीओ के माध्यम से केंद्र स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रों पर किसानों के लिए पेयजल, छाया, शौचालय और प्राथमिक उपचार जैसी बुनियादी सुविधाओं के साथ-साथ उपज की सुरक्षा के लिए तिरपाल और अग्निशमन यंत्रों की व्यवस्था की गई है। उपार्जन कार्य की निगरानी अनुविभागीय अधिकारियों द्वारा की जा रही है ताकि नीतिगत प्रावधानों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित हो सके।


