ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली संकट: मुख्यालय छोड़ सागर में डेरा जमाए बैठे जिम्मेदार अधिकारी

ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली संकट: मुख्यालय छोड़ सागर में डेरा जमाए बैठे जिम्मेदार अधिकारी

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असमय बारिश और आंधी से चरमराई व्यवस्था, सुध लेने वाला कोई नहीं

सागर। जिले में इन दिनों मौसम का मिजाज बदला हुआ है। बेमौसम बारिश और तेज आंधी के कारण जिले के अनेक ग्रामीण अंचलों की विद्युत व्यवस्था पटरी से उतर गई है। एक ओर जहां किसान और ग्रामीण अंधेरे में रात गुजारने को मजबूर हैं, वहीं दूसरी ओर विभाग के जिम्मेदार अधिकारी अपने निर्धारित मुख्यालय (DC – वितरण केंद्र) से नदारद नजर आते हैं।

मुख्यालय केवल कागजों पर, वास सागर में

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में तैनात अधिकांश लाइन इंस्पेक्टर और कनिष्ठ वरिष्ठ अभियंता (AE/JE) अपने आवंटित मुख्यालयों पर रहने के बजाय जिला मुख्यालय सागर शहर में समय बिताना अधिक पसंद कर रहे हैं। नियमतः अधिकारियों को अपने कार्यक्षेत्र में उपस्थित रहना चाहिए ताकि आपात स्थिति में सुधार कार्य जल्द शुरू हो सके, लेकिन हकीकत इसके उलट है।

आंधी-तूफान ने बढ़ाई मुसीबत

पिछले कुछ दिनों से जारी आंधी और असमय बारिश ने ग्रामीण इलाकों में बिजली के खंभों और तारों को भारी नुकसान पहुँचाया है। ग्रामीणों का आरोप है कि:
* शिकायत का समाधान नहीं: बिजली गुल होने पर जब ग्रामीण बिजली दफ्तर पहुँचते हैं, तो वहां केवल निचले स्तर के कर्मचारी मिलते हैं, जिनके पास पर्याप्त संसाधन या आदेश नहीं होते।
फोन से दूरी: समस्या के समय साहबों के फोन या तो ‘पहुंच से बाहर’ होते हैं या फिर उन्हें उठाया नहीं जाता।
अंधेरे में रातें: कई गांवों में 24 से 48 घंटों तक बिजली न आने से पेयजल आपूर्ति भी ठप हो गई है।

“अधिकारी शहर की सुख-सुविधाओं में व्यस्त हैं और ग्रामीण जनता यहां अंधेरे और मच्छरों के बीच रात काट रही है। आंधी में तार टूटते हैं, तो उन्हें जोड़ने वाला कोई नहीं मिलता-  पीड़ित ग्रामीण

विभाग की चुप्पी और बढ़ता रोष

ग्रामीणों में विभाग की इस कार्यशैली को लेकर भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि यदि अधिकारी अपने डीसी (DC) कार्यालयों में बैठना शुरू कर दें, तो समस्याओं का निराकरण घंटों के बजाय मिनटों में हो सकता है। अब देखना यह होगा कि क्या बिजली विभाग के उच्चाधिकारी इन ‘शहर प्रेमी’ बाबुओं पर कोई नकेल कसते हैं या ग्रामीण इसी तरह अव्यवस्था की मार झेलते रहेंगे।

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