MP में क्राइम ब्रांच के ASI ओर कांस्टेबल को आम लोगों की कॉल डिटेल्स बेचने के आरोप में ATS ने पकड़ा,जाने मामला
इंदौर। शहर में कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) से जुड़े एक गंभीर मामले में आतंकवाद विरोधी दस्ते (एटीएस) ने क्राइम ब्रांच के दो पुलिसकर्मियों को हिरासत में लिया है। दोनों पर आम नागरिकों की निजी कॉल डिटेल अवैध रूप से बेचने का संदेह जताया जा रहा है। यह कार्रवाई एक निजी डिटेक्टिव एजेंसी संचालक की कॉल डिटेल खंगालने के दौरान सामने आए लिंक के आधार पर की गई।
सूत्रों के मुताबिक, सिपाही रविंद्र और एएसआई राम को एटीएस मुख्यालय में रखकर पूछताछ की जा रही है। बताया जा रहा है कि रविंद्र, निरीक्षक विष्णु वास्कले के अधीन कार्यरत था, जबकि एएसआई राम क्राइम ब्रांच थाने में पदस्थ हैं।
जानकारी के अनुसार, एएसआई राम एक धोखाधड़ी के मामले में सिपाही कन्हैया के साथ महाराष्ट्र जा रहे थे। इसी दौरान एटीएस टीम ने टावर लोकेशन के आधार पर उनका पीछा करते हुए उन्हें पकड़ लिया। वहीं, सिपाही रविंद्र को गुरुवार सुबह उसके घर से हिरासत में लिया गया।
जांच में सामने आया है कि दोनों का संपर्क डिटेक्टिव एजेंसी संचालक मुकेश तोमर से था। आरोप है कि वह खुफिया जानकारी जुटाने के नाम पर भारी रकम लेकर लोगों की कॉल डिटेल उपलब्ध कराता था। इसी कड़ी में रविंद्र का नंबर भी मुकेश तोमर की कॉल डिटेल में मिला, जिसके बाद एटीएस ने कार्रवाई तेज कर दी।
पूछताछ के दौरान रविंद्र ने बताया कि मुकेश तोमर ने जनसुनवाई में एक शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके संबंध में दोनों के बीच कई बार बातचीत हुई थी। इस मामले में बयान दर्ज कराने के लिए उसे नोटिस भी भेजा गया था।
कैसे हासिल की जाती हैं कॉल डिटेल्स
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि कुछ मामलों में पुलिसकर्मी जांच प्रक्रिया का सहारा लेकर सीडीआर निकाल लेते हैं। विवेचना, गुमशुदगी या अपहरण जैसे मामलों में संदिग्ध व्यक्तियों के साथ उन लोगों के नंबर भी शामिल कर दिए जाते हैं, जिनकी कॉल डिटेल हासिल करनी होती है। इसके बाद संबंधित कंपनियों को ई-मेल के जरिए जानकारी मांगी जाती है। कई बार अधिकारी इस प्रक्रिया पर पर्याप्त निगरानी नहीं रखते, जिससे इस तरह की अनियमितताएं सामने आती हैं।
फिलहाल, एटीएस पूरे मामले की बारीकी से जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल हो सकता है।


