सागर आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली का असर, खाली पड़ी 5 शराब दुकानों का 13वां ई टेंडर जारी
सागर। जिले में शराब दुकानों के ठेकों को लेकर चल रहा गतिरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है। तमाम कवायदों के बावजूद आबकारी विभाग अब तक 5 मदिरा दुकानों के लिए ठेकेदार खोजने में नाकाम रहा है। विभाग ने हार मानकर अब 13वें दौर की ई-टेंडर निविदा जारी की है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जब पिछले 12 दौर में खरीदार नहीं मिले, तो क्या इस बार हालात बदलेंगे?
संवादहीनता की ‘दीवार’ ने बढ़ाई दूरियां
बाजार के जानकारों और पुराने ठेकेदारों की मानें तो इस स्थिति के पीछे विभाग की ढुलमुल कार्यप्रणाली और भारी कम्युनिकेशन गैप है। ठेकेदारों का आरोप है कि विभाग के शीर्ष अधिकारियों और उनके बीच संवाद का कोई रास्ता नहीं बचा है।
मैडम न तो किसी ठेकेदार से मिलती हैं और न ही किसी समस्या पर बात करती हैं। जब नेतृत्व ही संवाद के लिए उपलब्ध न हो, तो निवेश करने से डर लगता है ठेकेदार (नाम न छापने की शर्त पर)
मीडिया से भी बनाई दूरी
विभागीय सुस्ती का आलम यह है कि केवल ठेकेदार ही नहीं, बल्कि मीडिया को भी अंधेरे में रखा जा रहा है। जिले के कलमकार लंबे समय से विभाग का पक्ष जानने के लिए अधिकारियों से संपर्क की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन न तो फोन उठाए जाते हैं और न ही कार्यालय में मुलाकात संभव हो पाती हैं, इस व्यवहार से विभाग की छवि धूमिल हो रही है।
सरकार को लग रहा राजस्व का चूना
एक तरफ सरकार राजस्व बढ़ाने के लिए नई नीतियों पर जोर दे रही है, वहीं सागर आबकारी विभाग की अकर्मण्यता और संवादहीनता के कारण शासन को करोड़ों रुपये के राजस्व का घाटा हो रहा है। अगर समय रहते अधिकारियों ने अपना रवैया नहीं बदला और ठेकेदारों के साथ समन्वय स्थापित नहीं किया, तो यह घाटा और भी बढ़ सकता है।

13वां राउंड: बार-बार टेंडर जारी होने के बाद भी ठेकेदारों में उत्साह की कमी नजर आ रही
अधिकारी की अनुपलब्धता, फोन न उठाना और कार्यालय में न मिलना बनी चर्चा का विषय।
राजस्व हानि, 5 दुकानों के न उठने से सरकारी खजाने पर सीधा असर।
मीडिया से दूरी, पारदर्शिता के अभाव में बढ़ रही हैं अटकलें।



