सागर में कर्पूरी ठाकुर की पहली प्रतिमा स्थापित, नेताओं ने बताया संघर्ष और सादगी के प्रतीक जननायक

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सागर में कर्पूरी ठाकुर की पहली प्रतिमा स्थापित, नेताओं ने बताया संघर्ष और सादगी के प्रतीक जननायक
सागर। भारत रत्न कर्पूरी ठाकुर ने संघर्ष, परिश्रम, दूरदृष्टि, सादगी को जीवन में अंगीकार कर देश को आगे बढ़ाने का कार्य किया। उक्त विचार विधानसभा अध्यक्ष श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने सागर में भारत रत्न कर्पूरी ठाकुर की प्रतिमा अनावरण कार्यक्रम में व्यक्त किए।
विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि भारत रत्न श्री कर्पूरी ठाकुर जी के चरणों में अपनी ओर से श्रद्धा व्यक्त करता हूं और उनके चरणों में नमन करता हूं। इस अवसर के हम साक्षी बन पा रहे हैं, इसके लिए रघु ठाकुर जी को हृदय से बहुत धन्यवाद देना चाहता हूं। रघु ठाकुर जी मौलिक विचारक हैं, राजनीतिक क्षेत्र में लंबे समय से काम कर रहे हैं, लेकिन राजनीतिक मूल्यों के प्रति उनका समर्पण रहा। इस कारण राजनीति में पदों की दौड़ में वह बिछड़ते हुए दिखाई देते होंगे, लेकिन सम्मान की दृष्टि से रघु ठाकुर की तुलना किसी और से नहीं की जा सकती। ऐसे रघु भाई हमारे परम मित्र हैं।
उन्होंने मुझे आग्रह किया था कि इस अवसर पर मैं उपस्थित रहूं, तो कर्पूरी ठाकुर जी का विषय था। मैंने बहुत उनसे चर्चा भी नहीं की, लेकिन उन्होंने कहा तो मैंने हां कर दिया था और इस परिप्रेक्ष्य में मैं आज यहां उपस्थित हुआ हूं और उपस्थित होकर निश्चित रूप से मैं बहुत ही अपने आप को गौरव का अनुभव कर रहा हूं।
श्री राजभूषण उनके क्षेत्र की यात्रा के साक्षी रहे और उन्होंने बहुत ही प्रेरणादायक विषय हम सब लोगों के सामने रखा है। मैं समझता हूं ऐसे अवसर न सिर्फ भाषण के लिए होते हैं, न सिर्फ प्रतिमा पर पुष्प अर्पित करने के लिए होते हैं, ऐसे अवसर प्रेरणा लेने के लिए होते हैं। इस अवसर से हम प्रेरणा लें, कर्पूरी जी के व्यक्तित्व को, कृतित्व को, उनकी साधना को, उनके संघर्ष को, उनके समर्पण को, उनकी संवेदनशीलता को, उनकी दूरदृष्टि को अपने जीवन में अगर हम अंगीकार करें तो अपने जीवन को भी सार्थक बना सकते हैं और देश के कल्याण के लिए भी निश्चित रूप से कुछ करने में योगदान देने में हमारी भूमिका हो सकती है।
आज भौतिक प्रतिस्पर्धा का दौर है, इसलिए हर व्यक्ति प्रतिस्पर्धा की दौड़ में आगे निकलना चाहता है, लेकिन समय-परिस्थितियां ऐसी बन रही हैं कि प्रतिस्पर्धा के मानदंड बदलते जा रहे हैं। आज की प्रतिस्पर्धा सफलता की है, संपन्नता की है, संप्रदायता की है, यश की है और इस दौड़ में सब लोग दौड़े चले जा रहे हैं। अंजाम क्या होगा, मंजिल कहां मिलेगी, इसका किसी को मालूम नहीं है, लेकिन दौड़ने में कोई भी पीछे नहीं रहना चाहता है। लेकिन मैं इस अवसर पर कहना चाहता हूं कि मित्रों, हमारा यह देश और हमारी भारतीय संस्कृति ने कभी भी न तो हाड़-मांस के ढांचे की पूजा की और न ही पैसे की पूजा की। हमारी संस्कृति में हमेशा गुणों की पूजा हुई, नैतिकता की पूजा हुई। कोई टाटा-बिरला के बाद मानेगा या नहीं मानेगा, इसकी गारंटी नहीं है, लेकिन अगर सागर से गुजरा हुआ कोई फकीर कोई बात कह जाए तो उसकी मानने के लिए लोग विवश होते हैं। तो फकीरी में जीने वाला यह देश है, इसलिए आप स महसूस करते होंगे, एक कालखंड था जब हमारे देश में सैकड़ों रियासतें थीं, राजा-महाराजा, सुल्तान, बादशाह जगह-जगह पर थे। देश में कहीं भी चले जाओ, हर जगह राजा, सुल्तान, बादशाह की मूर्तियां और छतरियां आपको लगी हुई मिल जाएंगी। वे राजा भी थे, महाराजा भी थे, संपन्नता भी थी, आज भी संपन्नता दिखाई देती होगी, लेकिन बिना गुण के कोई उन मजारों पर पुष्प अर्पित करने और दिया जलाने नहीं जाता। जिसमें गुण था, उनकी पूजा होती है, चाहे वह महाराणा प्रताप हों, महर्षि दधीचि हों, कबीर जी हों, भक्त रविदास हों। कौन कहां का है, कौन बिरादरी का है, कौन किस मजहब का है, इससे कोई लेना-देना नहीं, लेकिन वे पूजित किए जाने वाले लोग हैं। योग्य गुणों में है, तो यह सारा समाज, सारा देश उनकी पूजा निश्चित रूप से करता है।
मंजिल खुद आकर कदम चूम लेती है, अगर पथिक हिम्मत न हारे। कर्पूरी ठाकुर की मूर्ति बेशक दशक बाद आज लगी हो मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के बीच में, लेकिन कर्पूरी ठाकुर के व्यक्तित्व ने लोगों को प्रेरणा देने का काम किया, तो कर्पूरी ठाकुर के पास भारत रत्न भी चलकर आया और कर्पूरी ठाकुर की प्रतिमा स्थापित करने के लिए भी हम सब लोग विवश हुए। सब कहते हैं कर्पूरी ठाकुर के पास गाड़ी नहीं थी, उनके पास बैंक बैलेंस नहीं था, उनके पास बहुत अच्छे कपड़े नहीं थे, उनके पास बड़ी जमीन-जायदाद नहीं थी, लेकिन मैंने पूर्व में भी कहा, यह देश उन सब चीजों की पूजा करता ही नहीं है। यह देश पूजा करता है मानव के अंदर फकीरी और दूसरों के लिए जीने के जज्बे की, और वह जज्बा कर्पूरी जी में था। इसलिए आज हम सब लोग यहां उनको अपना श्रद्धासुमन अर्पित करने के लिए एकत्रित हुए हैं।
इस अवसर पर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री राजभूषण चौधरी ने कहा कि भारत रत्न श्री कर्पूरी ठाकुर का जीवन संघर्ष, सादगी, समर्पण और परिश्रम से भरा था। इसी सादगी भरे जीवन से उन्होंने दो बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर समाज उत्थान किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने गरीब एवं अभावग्रस्त व्यक्तियों के लिए कार्य किया।
उन्होंने कहा कि 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में शामिल हुए और मेधावी छात्र थे, किंतु उन्होंने पढ़ाई छोड़कर आजादी का मार्ग चुना। उन्होंने कहा कि जब तक भारत माता परतंत्रता की बेड़ियों से मुक्त नहीं हो जाती, तब तक वे इस लड़ाई को लड़ते रहेंगे।
उन्होंने पिछड़े वर्ग, गरीब वर्ग के लिए हमेशा संघर्ष किया। उन्होंने आठ बार विधानसभा चुनाव जीता। वे अपराजित जननायक थे। उन्होंने सत्ता के सर्वोच्च पद पर रहते हुए सभी वर्गों के लिए कार्य किया।
मंत्री श्री राजभूषण चौधरी ने कहा कि वे जीवनभर सादगी में रहे। बंगला, बैंक बैलेंस भी उनके पास नहीं था। उन्होंने कहा कि समस्तीपुर ग्राम में उन्होंने बहुत कार्य किया।
इस अवसर पर मध्य प्रदेश शासन के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि कर्पूरी ठाकुर ने सत्ता को सेवा का केंद्र बनाया और उसी के माध्यम से जनसेवा की। उन्होंने कहा कि तपस्या, ईमानदारी, संकल्प, श्रम और परिश्रम लेकर वे हमेशा चलते थे, जिससे उनकी हमेशा विजय होती थी। उन्होंने कहा कि कर्पूरी ठाकुर ने गरीबों, पिछड़ों, जरूरतमंदों की लड़ाई लड़ी और उनको समाज की मुख्य धारा से जोड़ने का कार्य किया। उन्होंने कहा कि कपूरी ठाकुर न केवल एक राजनेता थे बल्कि पर एक समाज सुधारक भी थे।
इंदिरा गांधी कला मंच के अध्यक्ष श्री राम बहादुर राय ने कहा कि कर्पूरी ठाकुर शांति और क्रांति के समन्वयक थे।
पूर्व गृहमंत्री, खुरई विधायक श्री भूपेंद्र सिंह ने कहा कि सादगी जननेता का आभूषण है। विधायक श्री शैलेंद्र जैन ने कहा कि कर्पूरी ठाकुर राजनीति में सादगी और शुचिता के पुरोधा थे। विधायक श्री प्रदीप लारिया ने कहा कि जननायक भारत रत्न कर्पूरी ठाकुर अद्भुत प्रतिभा के धनी थे।
महापौर श्रीमती संगीता सुशील तिवारी ने कहा कि कर्पूरी ठाकुर समाज के लिए एक नई ऊर्जा थे, एक अद्भुत, चमत्कारी प्रतिभा के धनी थे। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने उनको भारत रत्न देकर सम्मानित कर जो काम किया, वह सराहनीय है। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि कर्पूरी जी ठाकुर की जो प्रतिमा स्थापित हो रही है, वह पूर्व मंत्री श्री भूपेंद्र सिंह जी के प्रयासों के कारण हो रही है, जिनके प्रयास से यहां अटल पार्क में जमीन उपलब्ध हुई। उन्होंने कहा कि कर्पूरी ठाकुर के सिद्धांतों से प्रेरणा लेकर हमें आगे बढ़ना होगा।
समाजवादी चिंतक एवं कार्यक्रम के अध्यक्ष श्री रघु ठाकुर ने कहा कि तत्कालीन नगरीय प्रशासन मंत्री श्री भूपेंद्र सिंह के सहयोग से इस मूर्ति के लिए नगर निगम के माध्यम से जमीन उपलब्ध हुई और आज भारत रत्न कर्पूरी ठाकुर की मूर्ति स्थापना हो रही है। उन्होंने कहा कि कर्पूरी ठाकुर में महात्मा गांधी, राम मनोहर लोहिया, जयप्रकाश का मिलन था, जिनके सिद्धांतों पर कर्पूरी ठाकुर ने अपने व्यक्तित्व को निखारकर आगे बढ़े। श्री कर्पूरी ठाकुर में गांधी जी के गुण थे, जिनके माध्यम से उन्होंने अनेक कार्य किए।
उन्होंने कहा कि योग्यता की कसौटी योग्यता नहीं थी, योग्यता की कसौटी भाषा थी, तब जाकर बिहार में अंग्रेजी की अनिवार्यता को खत्म कराया। उन्होंने कहा कि इसी प्रकार सिविल सर्विस में सी-सेट की अनिवार्यता को खत्म होना चाहिए, जिससे कि हिंदीभाषी प्रदेश के परीक्षार्थी चयनित हो सकें। उन्होंने कहा कि कर्पूरी ठाकुर राष्ट्रीय धरोहर हैं, हमें उनके सिद्धांतों पर चलना चाहिए।
कार्यक्रम में श्री लालचंद घोसी एवं श्री राजेश्वर सेन ने प्रतीक चिन्ह भेंट किया। इस अवसर पर जिला अध्यक्ष श्री श्याम तिवारी, पूर्व सांसद श्री लक्ष्मी नारायण यादव, पूर्व सांसद श्री राजबहादुर सिंह, श्री गौरव सिरोठिया, पूर्व विधायक श्री सुनील जैन, श्री सुशील तिवारी, श्री सुखदेव तिवारी, श्री राम कुमार पचौरी, श्री विनोद तिवारी, श्री जाहर सिंह, श्री राजेश्वर सेन, श्री शैलेष केशरवानी, श्री नेवी जैन, नगर निगम कमिश्नर श्री राजकुमार खत्री सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन श्री जयंत सिंह तोमर ने किया।

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