विश्व शांति के लिए चिकित्सकों ने रखा मौन, कहा युद्ध नहीं, बुद्ध और गांधी की राह बचाएगी दुनिया
सागर। वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में जहाँ चारों ओर युद्ध के बादल मंडरा रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय कानूनों की अनदेखी की जा रही है, ऐसे में शांति और अहिंसा ही एकमात्र विकल्प है। इसी उद्देश्य के साथ यूनाइटेड मेडिकल फोरम (UMF) और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA), सागर शाखा द्वारा बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज स्थित मृत्युंजय महादेव मंदिर में ‘मौन शांति सभा’ का आयोजन किया गया।
गांधी दर्शन से ही संभव है समाधान
कार्यक्रम की शुरुआत में भारतमाता और महात्मा गांधी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की गई। उपस्थित चिकित्सकों ने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि आज राष्ट्रीय हित से कहीं ज्यादा वर्चस्व की लड़ाई और प्राकृतिक संसाधनों की लूट ने युद्ध की स्थिति पैदा कर दी है। वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि ऐसे संकटपूर्ण समय में केवल गांधी जी का दर्शन ही विश्व को विनाश से बचा सकता है।
अहिंसक विरोध सबसे सशक्त माध्यम
वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. सर्वेश जैन ने शांत मन के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले सकारात्मक प्रभावों का विश्लेषण किया। उन्होंने कहा:
विसंगतियों और अन्याय का विरोध करना आवश्यक है, लेकिन इसका तरीका अहिंसक होना चाहिए। सड़क पर हंगामा करने के बजाय धरना, प्रदर्शन और शांतिपूर्ण रैलियां कहीं अधिक सकारात्मक और प्रभावी साधन हैं।
भारतीयता का मूल है अहिंसा
IMA अध्यक्ष डॉ. तल्हा साद ने संबोधित करते हुए कहा कि भारतीयता की अवधारणा और गांधीवाद के मूल में ‘अहिंसा’ और ‘शांति’ रची-बसी है। उन्होंने आह्वान किया कि वैश्विक स्तर पर ईगो (अहंकार) को त्याग कर मानवता के बारे में सोचा जाना चाहिए।
इनकी रही उपस्थिति
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित जनों ने दो मिनट का मौन रखकर विश्व शांति की मंगल कामना की। इस अवसर पर डॉ. संजीव मुखारिया, डॉ. संजयोत माहेश्वरी, डॉ. दीपक श्रीवास्तव, डॉ. अमर गंगवानी सहित अनेक गणमान्य चिकित्सक और फोरम के सदस्य उपस्थित रहे।


