बीना विधायक निर्मला सप्रे पर दल-बदल विवाद : हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान बोलीं- अब भी कांग्रेस में हूं’ सिंघार को सबूत पेश करने के निर्देश

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बीना विधायक निर्मला सप्रे पर दल-बदल विवाद : हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान बोलीं- अब भी कांग्रेस में हूं’ सिंघार को सबूत पेश करने के निर्देश

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मध्य प्रदेश के सागर जिले की बीना विधानसभा सीट से विधायक निर्मला सप्रे से जुड़े मामले में मंगलवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान सप्रे ने स्पष्ट कहा कि वह अभी भी कांग्रेस पार्टी की सदस्य हैं। कोर्ट ने उनके इस बयान को रिकॉर्ड पर ले लिया।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार को निर्देश दिए गए कि वे सप्रे के भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के ठोस प्रमाण प्रस्तुत करें। इस पर सिंघार की ओर से बताया गया कि वे 9 अप्रैल तक पार्टी व्हिप से जुड़े दस्तावेज कोर्ट में जमा करेंगे। मामले की अगली सुनवाई 20 अप्रैल को तय की गई है। इसी दिन विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष भी इस प्रकरण पर सुनवाई प्रस्तावित है।
गौरतलब है कि वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में निर्मला सप्रे ने बीना सीट से कांग्रेस के टिकट पर जीत दर्ज की थी। इसके बाद 5 मई 2024 को लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान वे मुख्यमंत्री मोहन यादव के साथ बीजेपी के एक कार्यक्रम में दिखाई दी थीं, जिसके बाद उनके दल बदलने को लेकर अटकलें शुरू हो गई थीं।
इसी को आधार बनाते हुए 5 जुलाई 2024 को उमंग सिंघार ने विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष याचिका दायर कर सप्रे की सदस्यता समाप्त करने की मांग की थी। उनका तर्क था कि संविधान की 10वीं अनुसूची के अनुसार दल बदलने पर विधायक की सदस्यता समाप्त हो जाती है। जब इस पर कोई फैसला नहीं हुआ, तो नवंबर 2024 में उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
मंगलवार को इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ ने की। सप्रे की ओर से पेश अधिवक्ता संजय अग्रवाल ने कोर्ट को बताया कि उनकी मुवक्किल अब भी कांग्रेस में हैं, ऐसे में उनकी सदस्यता समाप्त करने का सवाल ही नहीं उठता।
वहीं राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने बताया कि यह मामला विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष विचाराधीन है और संबंधित पक्षों के बयान भी दर्ज किए जा चुके हैं।
सिंघार की ओर से अधिवक्ता विभोर खंडेलवाल ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए दलील देते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर मौजूद तस्वीरें और पोस्ट सप्रे के बीजेपी से जुड़ाव के संकेत देते हैं। हालांकि, इस पर कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर किसी की राजनीतिक स्थिति तय नहीं की जा सकती।
कोर्ट ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिए कि वे विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष ठोस और प्रमाणिक साक्ष्य प्रस्तुत करें, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि वास्तव में दल परिवर्तन हुआ है या नहीं।

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