उपभोक्ता फोरम ने कहा कार ठीक न करने पर डीलर लौटाएगा मरम्मत के पैसे, देना होगा हर्जाना
सागर। शहर के एक कार मालिक को वाहन सुधार के नाम पर परेशान करना महिंद्रा के अधिकृत डीलर स्टार ऑटोमोबाइल्स को भारी पड़ गया। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग ने डीलर की सेवा में कमी पाते हुए आदेश दिया है कि वह ग्राहक से मरम्मत के नाम पर लिए गए 61,490 रुपये वापस करे और मानसिक प्रताड़ना के लिए 10 हजार रुपये का हर्जाना भी दे।
क्या है पूरा मामला ?
मोहन नगर वार्ड निवासी प्रियंक सिंघई ने साल 2016 में बैंगलोर से महिंद्रा की कार खरीदी थी। नवंबर 2017 में वे कार लेकर सागर आ गए। कार के डैशबोर्ड पर इंजन चेक लाइट जलने की समस्या आने पर उन्होंने बामौरा स्थित स्टार ऑटोमोबाइल्स को सुधार के लिए वाहन सौंपा।
शिकायत के अनुसार:
– पहली बार सुधार के नाम पर 5,328 रुपये का बिल लिया गया, लेकिन समस्या हल नहीं हुई।
– बार-बार गाड़ी गर्म होने और डैशबोर्ड पर एरर आने की शिकायत के बाद भी डीलर गाड़ी ठीक नहीं कर सका।
– हैरानी की बात यह रही कि अधिकृत डीलर ने खुद सुविधा न होने की बात कहकर गाड़ी बाहर की एक निजी वर्कशॉप में ठीक करवाई, जिसका बिल 11,000 रुपये बना।
– इसके बाद फिर से पार्ट्स बदले गए और 50,490 रुपये का भारी-भरकम बिल थमाया गया, फिर भी समस्या जस की तस बनी रही।
फोरम ने लगाई फटकार
परेशान होकर परिवादी ने अधिवक्ता पवन नन्होरिया के माध्यम से उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज कराई। आयोग के अध्यक्ष राजेश कुमार कोष्टा और सदस्य अनुभा वर्मा ने मामले की सुनवाई की। साक्ष्यों के आधार पर यह स्पष्ट हुआ कि बार-बार मरम्मत और मोटी रकम लेने के बावजूद डीलर गाड़ी की तकनीकी खराबी दूर करने में विफल रहा।
उपभोक्ता फोरम ने बोला
पैसे वापस करें, डीलर को मरम्मत में खर्च हुए कुल 61,490 रुपये दो महीने के भीतर लौटाने होंगे।
गाड़ी ठीक करके दें, एक महीने के अंदर कार की सभी कमियां दूर कर पूरी संतुष्टि के साथ परिवादी को सौंपनी होगी।
हर्जाना, मानसिक परेशानी के लिए 10,000 रुपये और केस लड़ने के खर्च के रूप में 2,000 रुपये अलग से देने होंगे। यह फैसला उन वाहन स्वामियों के लिए नजीर है जो अधिकृत सर्विस सेंटर की लापरवाही और बार-बार बिल भरने के बावजूद तकनीकी समस्याओं से जूझते रहते हैं।


