मासूम की जान जाने के 5 दिन बाद आयोजक और डीजे संचालक पर मुकदमा दर्ज
ब्यूरो सागर। मकरोनिया क्षेत्र में हनुमान जयंती की शोभायात्रा के दौरान हुए हृदयविदारक हादसे ने एक बार फिर प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस की कछुआ चाल कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस हादसे में एक 14 वर्षीय मासूम की मौके पर ही मौत हो गई, उस मामले में एफआईआर दर्ज करने में पुलिस को पूरे 5 दिन लग गए।
आखिर 5 दिन तक किसका इंतज़ार कर रही थी पुलिस?
घटना गुरुवार रात की है, जब ‘श्रीराम भक्त संगठन कमेटी’ की शोभायात्रा में क्षमता से अधिक लदे डीजे फ़्रेम सिस्टम गिरने से एक बालक की जान चली गई और पांच अन्य घायल हो गए। हैरानी की बात यह है कि प्रत्यक्षदर्शियों और वीडियो साक्ष्यों के बावजूद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करने के बजाय 6 दिनों तक केवल मर्ग और विवेचना ही चली।
सवाल यह उठता है कि
क्या मासूम की जान की कीमत इतनी कम है कि पुलिस को जिम्मेदारी तय करने में एक सप्ताह का समय लग गया?
आयोजक और डीजे संचालक की लापरवाही
शोभायात्रा के नाम पर नियमों को ताक पर रखकर सड़कों पर भारी-भरकम साउंड सिस्टम निकालना अब फैशन बन गया है।
असुरक्षित ढांचा: वाहन (एमपी 13 जीबी 2974) के बाहर लोहे के असुरक्षित एंगल पर भारी साउंड सिस्टम रखे गए थे।
समिति की अनदेखी
आयोजकों ने भीड़ के बीच इतने खतरनाक सिस्टम को अनुमति कैसे दी? क्या सुरक्षा मानकों की जांच की गई थी ?
नियमों का उल्लंघन
जिगजैग ब्रेकर पर वाहन के अनियंत्रित होते ही सिस्टम गिरना यह साबित करता है कि फिटिंग में भारी लापरवाही थी।
अब तक की कार्रवाई
5 दिनों की लंबी जांच के बाद, एसआई राकेश शर्मा ने आर्यन कोरी की ओर से प्रिंस डीजे संचालक और समिति के आयोजकों पर मामला दर्ज किया है। पुलिस भले ही अब इसे अपनी मुस्तैदी बताए, लेकिन जनता के बीच यह संदेश साफ है कि सिस्टम तभी जागता है जब दबाव बढ़ता है।
शोभायात्राओं में जब तक सुरक्षा के कड़े मानक तय नहीं होंगे और पुलिस तत्काल एक्शन की नीति नहीं अपनाएगी, तब तक हादसों को आमंत्रण मिलता रहेगा।


