रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा गया परियोजना यंत्री दोषी करार

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सागर।  विशेष न्यायालय ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के एक मामले में 11 अप्रैल 2026 को फैसला सुनाते हुए लोक निर्माण विभाग (पीआईयू) में पदस्थ रहे परियोजना यंत्री मुलायम प्रसाद अहिरवार को दोषी ठहराया है। यह मामला लोकायुक्त पुलिस सागर द्वारा वर्ष 2022 में की गई ट्रैप कार्रवाई से जुड़ा हुआ है।

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अभियोजन के अनुसार आरोपी ने खुरई स्थित इंडोर स्टेडियम निर्माण कार्य से संबंधित बिलों के भुगतान के एवज में ठेकेदार से कमीशन की मांग की थी। शिकायतकर्ता नीलेश कुमार दीक्षित ने 3 जनवरी 2022 को लोकायुक्त कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें बताया गया था कि लगभग 15 लाख रुपये के बिल निकालने के लिए आरोपी द्वारा करीब 20 हजार रुपये रिश्वत मांगी जा रही है।

शिकायत के सत्यापन के लिए लोकायुक्त पुलिस ने बातचीत रिकॉर्ड कराई, जिसमें आरोपी द्वारा रिश्वत मांगने की पुष्टि हुई। इसके बाद 10 जनवरी 2022 को ट्रैप दल गठित कर कार्रवाई की गई। शिकायतकर्ता को निर्धारित राशि के साथ आरोपी के पास भेजा गया, जहां आरोपी ने अपने कार्यालय में रिश्वत की राशि प्राप्त कर ली। तय संकेत मिलने पर ट्रैप दल ने मौके पर पहुंचकर आरोपी को पकड़ लिया।

जांच के दौरान आरोपी के कब्जे से 20 हजार रुपये बरामद किए गए, जिनके नंबर पूर्व में तैयार पंचनामे से मेल खाते पाए गए। रासायनिक परीक्षण में भी आरोपी के हाथों पर रिश्वत लेने के प्रमाण मिले। साथ ही ऑडियो रिकॉर्डिंग, दस्तावेज और गवाहों के बयान न्यायालय में प्रस्तुत किए गए।

सुनवाई के दौरान न्यायालय ने सभी साक्ष्यों का परीक्षण करते हुए पाया कि आरोपी द्वारा रिश्वत की मांग और प्राप्ति दोनों सिद्ध हैं। इसके आधार पर न्यायालय ने आरोपी को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7 के तहत दोषी ठहराते हुए निर्णय पारित किया। जिसमें 4 साल कारावास और 40 हजार रुपये जुर्माना मुकर्रर किया गया हैं रकम अदा न करने पर 3 माह की सजा में इजाफा हो जाएगा।

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