IPL की शुरुआत के साथ ही सक्रिय हुआ सट्टे का काला कारोबार, हाईटेक नेटवर्क तैयार, बीते साल हुई थी यह कार्यवाई 

आईपीएल की शुरुआत के साथ ही सक्रिय हुआ सट्टे का काला कारोबार, हाईटेक नेटवर्क तैयार

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सागर। इंडियन प्रीमियर प्रेमियर लीग का रोमांच शुरू होते ही सट्टेबाजों ने भी अपना जाल बिछाना शुरू कर दिया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सागर सहित पूरे मध्य प्रदेश में सटोरियों ने अपना एक मजबूत और व्यापक नेटवर्क स्थापित कर लिया है। पुलिस की पैनी नजर से बचने के लिए इस बार सट्टेबाज तकनीक का सहारा लेकर ‘हाईटेक’ तरीके से काम कर रहे हैं।

नेट आईडी के जरिए ‘रिमोट कंट्रोल’ सट्टा

सूत्रों का दावा है कि सट्टा माफिया अब पुराने तौर-तरीकों को छोड़कर डिजिटल मोड पर आ गए हैं। सटोरियों ने बड़े पैमाने पर ऑनलाइन नेट आईडी तैयार की हैं। इन आईडी के माध्यम से सट्टे का संचालन शहर के भीतर से नहीं, बल्कि दूर बैठकर या अज्ञात ठिकानों से किया जा रहा है।
इस सिस्टम की खास बात यह है कि लोकेशन ट्रैक करना मुश्किल, सटोरिये मुख्य शहर से दूर सुरक्षित ठिकानों या अन्य राज्यों से बैठकर नेटवर्क ऑपरेट कर रहे हैं।
डिजिटल लेन-देन, सट्टे की रकम का लेनदेन अब नकद के बजाय हवाला और विभिन्न ऑनलाइन पेमेंट गेटवे के जरिए किया जा रहा है।
कोडवर्ड का उपयोग, बातचीत और सौदों के लिए हाई-एंड एन्क्रिप्टेड ऐप्स और विशेष कोडवर्ड का इस्तेमाल हो रहा है।
सागर बना सटोरियों का नया ठिकाना!

विश्वस्त सूत्रों की मानें तो सागर जिला सट्टेबाजों के लिए एक रणनीतिक केंद्र के रूप में उभरा है। यहाँ से न केवल स्थानीय बल्कि प्रदेश के अन्य जिलों के छोटे सटोरियों को भी लाइन और आईडी बांटी जा रही हैं। आईपीएल के दौरान करोड़ों रुपये के दांव लगने की आशंका जताई जा रही है।
पुलिस की चुनौती
हालांकि पुलिस प्रशासन लगातार अवैध गतिविधियों पर नजर रखने का दावा करता है, लेकिन सटोरियों का यह डिजिटल शिफ्ट सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। बिना किसी भौतिक ऑफिस या रंगे हाथ पकड़े जाने के डर के, ये सटोरिये मोबाइल स्क्रीन के पीछे से पूरे खेल को नियंत्रित कर रहे हैं।
> सूत्रों का कहना है कि “इस बार सट्टे का नेटवर्क काफी फैला हुआ है गली-मोहल्लों तक इसकी पहुंच हो चुकी है। मुख्य सरगना पर्दे के पीछे रहकर केवल आईडी और पासवर्ड का खेल खेल रहे हैं।

बीते साल आईपीएल सट्टेबाजी पर पुलिस का इस तरह रहा शिकंजा

सागर पुलिस ने पिछले कुछ वर्षों में हाई-टेक होते इस सट्टेबाजी के कारोबार पर कई बड़े प्रहार किए हैं।

​1. कार्रवाई: मार्च (2025-26) मोतीनगर थाना पुलिस ने एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने राहतगढ़ बस स्टैंड के पास से एक युवक को पकड़ा, जो मोबाइल के जरिए हार-जीत का दांव लगवा रहा था।

पुराने रिकॉर्ड और बड़ी पुलिस कार्रवाइयां

​सागर में सट्टेबाजी का तरीका अब पर्चियों से बदलकर डिजिटल ऐप्स और वेबसाइट्स (Tiger777, Starbook247) पर शिफ्ट हो गया है।

2- ​गोपालगंज पुलिस (2022): पुलिस ने सरकारी बस स्टैंड के पास दबिश देकर दो युवकों को गिरफ्तार किया था। इनके पास से 24 लाख 70 हजार रुपये की भारी-भरकम नकदी बरामद हुई थी। यह सागर के इतिहास में आईपीएल सट्टे पर की गई सबसे बड़ी नकद बरामदगी में से एक थी।
​मुख्य सरगना: इस मामले में कोई सोनी और मोदी जैसे नाम सामने आए थे, जो ऑनलाइन आईडी के जरिए बड़े पैमाने पर बुकिंग ले रहे थे।

​कोतवाली क्षेत्र में छापेमारी (2020): भीतर बाजार इलाके में पुलिस ने चार सटोरियों को रंगे हाथों पकड़ा था। इस दौरान पुलिस ने करीब 63 लाख रुपये के लेनदेन का हिसाब और बड़ी मात्रा में नकदी जब्त की थी।
​सट्टेबाजों का नया ‘मोडस ऑपेरंडी’

​जानकार बताते हैं कि अब सट्टेबाज किसी एक जगह बैठकर काम करने के बजाय ​फेक बैंक अकाउंट्स गरीब लोगों के आधार और पैन कार्ड का इस्तेमाल कर फर्जी खाते खुलवाते हैं (हाल ही में जबलपुर-सागर लिंक में इसका खुलासा हुआ)
​ऑनलाइन ऐप्स- सट्टेबाज अब सीधे क्लाइंट्स को आईडी और पासवर्ड देते हैं, जिससे पुलिस के लिए ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है। वॉट्सऐप ग्रुप्स- सट्टा अब बंद कमरों के बजाय वॉट्सऐप ग्रुप्स पर कोडवर्ड में चल रहा है।

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