अस्पताल प्रबंधन और पुलिस की बड़ी लापरवाही: बीएमसी से गायब मरीज की जिला अस्पताल में मौत
सागर | शहर की स्वास्थ्य व्यवस्था और पुलिस निगरानी पर बड़े सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (बीएमसी) के आईसीयू वार्ड में भर्ती एक मरीज संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गया और 11 दिनों बाद उसकी मौत की खबर जिला अस्पताल से सामने आई। हैरानी की बात यह है कि जिस मरीज को पुलिस शहर भर में तलाश रही थी, वह पास के ही सरकारी अस्पताल में ‘लावारिस’ बनकर भर्ती था।
क्या है पूरा मामला?
शहर के मोहननगर वार्ड निवासी 40 वर्षीय दिलीप उर्फ पाउडर साहू को कमर दर्द की शिकायत के चलते 25 फरवरी को बीएमसी में भर्ती कराया गया था। हालत गंभीर होने के कारण उसे आईसीयू में रखा गया था। 5 मार्च की सुबह जब परिजन वार्ड से बाहर गए, तभी दिलीप अचानक बिस्तर से गायब हो गया। परिजनों ने तत्काल गोपालगंज थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई।
हाथ में लगी थी ड्रिप, सड़क पर मिला बेहोश
बताया जा रहा है कि बीएमसी से निकलने के बाद दिलीप सड़क पर बेहोश होकर गिर पड़ा था। उसके हाथ में मेडिकल ड्रिप तक लगी हुई थी। किसी अज्ञात राहगीर ने मानवता दिखाते हुए उसे जिला अस्पताल पहुंचा दिया। वहां उसे ‘अज्ञात’ के रूप में भर्ती कर इलाज शुरू किया गया।
11 दिन तक चलता रहा ‘तलाश’ का नाटक
एक तरफ गोपालगंज पुलिस सीसीटीवी फुटेज खंगालने और आसपास के इलाकों में दबिश देने का दावा करती रही, वहीं दूसरी ओर मरीज जिला अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहा था। सोमवार को जब दिलीप ने दम तोड़ दिया, तब जाकर शिनाख्त हो पाई और परिजनों को सूचना मिली।
“मेरा भाई अविवाहित था और अगरबत्ती बनाने का काम करता था। पुलिस और अस्पताल प्रशासन के बीच समन्वय की कमी के कारण हमने उसे खो दिया। अगर समय रहते पता चल जाता कि वह जिला अस्पताल में है, तो शायद उसकी जान बच जाती- प्रमोद साहू, मृतक के भाई
इनका कहना हैं
गोपालगंज थाना प्रभारी घनश्याम शर्मा के अनुसार, पुलिस गुमशुदगी दर्ज कर लगातार तलाश कर रही थी। जिला अस्पताल प्रबंधन की ओर से किसी लावारिस मरीज के भर्ती होने की सूचना समय पर नहीं मिल सकी। पुलिस अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है ताकि मौत के सटीक कारणों का पता चल सके।
मुख्य बिंदु जो जांच के घेरे में हैं:
बीएमसी की सुरक्षा: आईसीयू का मरीज ड्रिप लगी हालत में वार्ड से बाहर कैसे निकल गया?
समन्वय का अभाव: जिला अस्पताल ने ‘लावारिस’ मरीज की सूचना पुलिस को क्यों नहीं दी?
पुलिस की कार्यप्रणाली: गुमशुदगी दर्ज होने के बाद भी नजदीकी अस्पतालों में फिजिकल वेरिफिकेशन क्यों नहीं किया गया?


