भाई-दूज का पर्व जीवन में आत्मिक दृष्टि को अपनाने की प्रेरणा देता है: बीके छाया दीदी
सागर। ब्रह्माकुमारी संस्थान के मकरोनिया सेवाकेंद्र पर गुरुवार को भाई-दूज पर्व मनाया गया। कार्यक्रम में सागर की निदेशिका वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका बीके छाया दीदी ने भाई-दूज के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पर्व केवल पारिवारिक परंपरा नहीं, बल्कि आत्मिक भाईचारे और पवित्र संबंधों को मजबूत करने का संदेश देता है।

उन्होंने कहा कि हम सभी आत्माएं एक ही परमपिता परमात्मा की संतान हैं, इसलिए इस दृष्टि से संपूर्ण विश्व एक परिवार है। जब मनुष्य इस आत्मिक सत्य को समझता है तो उसके भीतर स्वाभाविक रूप से प्रेम, सम्मान और सहयोग की भावना जागृत हो जाती है। भाई-दूज का पर्व इसी आत्मिक दृष्टि को जीवन में अपनाने की प्रेरणा देता है।
बीके छाया दीदी ने कहा कि वर्तमान समय में समाज में बढ़ते तनाव, कलह और रिश्तों में दूरियों का मुख्य कारण यह है कि मनुष्य अपने वास्तविक स्वरूप अर्थात आत्मा को भूल गया है। जब हम स्वयं को शरीर नहीं बल्कि शुद्ध, शांत और शक्तिशाली आत्मा समझते हैं, तब हमारे संबंधों में स्वार्थ, क्रोध और अहंकार स्वतः समाप्त होने लगते हैं। आत्मिक दृष्टि से देखने पर हर पुरुष भाई और हर महिला बहन के रूप में दिखाई देती है, जिससे समाज में पवित्रता और मर्यादा का वातावरण बनता है।
उन्होंने आगे कहा कि ब्रह्माकुमारीज संस्थान में भाई-दूज के दिन बहनें भाइयों को तिलक लगाकर उनके उज्ज्वल भविष्य, सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति की कामना करती हैं। साथ ही भाइयों को यह संकल्प भी कराया जाता है कि वे अपने जीवन में सदाचार, नशामुक्ति और सकारात्मक सोच को अपनाकर श्रेष्ठ जीवन जिएंगे।
कार्यक्रम में उपस्थित भाइयों और बहनों को राजयोग ध्यान का अभ्यास भी कराया गया, जिसके माध्यम से बताया गया कि सच्ची शक्ति और सुरक्षा परमात्मा से जुड़ने से प्राप्त होती है। जब मनुष्य अपने मन को परमात्मा से जोड़ता है, तब उसके जीवन में शांति, संतोष और स्थिरता आती है।
बीके खुशबू दीदी ने कहा कि होली का वास्तविक अर्थ है अपने मन के नकारात्मक संस्कारों—क्रोध, ईर्ष्या, लोभ और अहंकार—को त्यागकर प्रेम, शांति और पवित्रता के रंगों से जीवन को सजाना। यदि हम इन आध्यात्मिक मूल्यों को अपने व्यवहार में उतार लें, तो परिवार और समाज दोनों में सुख-शांति का वातावरण स्थापित हो सकता है।
कार्यक्रम के अंत में सभी भाई-बहनों को तिलक लगाकर भाई-दूज की शुभकामनाएं दी गई। साथ ही विश्व में शांति, सद्भावना तथा आध्यात्मिक जागृति के लिए सामूहिक राजयोग ध्यान किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भाई-बहनों और नागरिकों ने भाग लेकर आध्यात्मिक संदेश का लाभ उठाया।


