मध्य प्रदेश में सहकारिता को नई दिशा, समितियों की जमीन का होगा व्यावसायिक उपयोग; बड़े निवेश की राह खुली
भोपाल। मध्य प्रदेश में सहकारी समितियों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए सरकार नए रास्ते तलाश रही है। पेट्रोल पंप, एलपीजी वितरण, जन औषधि केंद्र, पर्यटन और जैविक खेती जैसे क्षेत्रों में काम के बाद अब समितियों की उपलब्ध जमीन को आय के स्रोत में बदलने की तैयारी है। योजना के तहत मुख्य सड़कों के किनारे स्थित जमीन पर व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स और कार्यालय विकसित किए जाएंगे।
इस दिशा में पहल राज्य सहकारी विपणन संघ (मार्कफेड) द्वारा की जाएगी। संघ के पास भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर समेत कई शहरों में प्रमुख स्थानों पर जमीन उपलब्ध है। इन जमीनों के बेहतर उपयोग के लिए विस्तृत कार्य योजना तैयार की जा रही है, जिससे नियमित आय के स्रोत विकसित हो सकें।
सरकार का उद्देश्य सहकारिता क्षेत्र को ग्रामीण अर्थव्यवस्था से सीधे जोड़ना है, ताकि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ें और समितियां आत्मनिर्भर बन सकें। केंद्र सरकार भी राज्यों को ऐसे मॉडल अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है, जिनसे सहकारी संस्थाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हो।
पिछले कुछ समय में इस दिशा में कई प्रयोग किए गए हैं। कृषि अधोसंरचना निधि के तहत खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों और गोदाम निर्माण के लिए वित्तीय सहायता दी गई। इसके अलावा उचित मूल्य की दुकानों को बहुउद्देश्यीय स्टोर में बदलने, कॉमन सर्विस सेंटर और प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र स्थापित करने जैसे प्रयास भी किए गए, ताकि गतिविधियां बढ़ सकें और आमदनी के नए रास्ते खुलें।
अब अगला कदम समितियों की प्रमुख स्थानों पर मौजूद जमीन का व्यावसायिक उपयोग करना है। इसके लिए व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स और कार्यालय बनाए जाएंगे। निर्माण कार्य में पुनर्घनत्वीकरण जैसे मॉडल को अपनाया जा सकता है, जिसमें निजी निवेशक निर्माण में लागत लगाएगा और बदले में उसे निर्धारित हिस्सेदारी दी जाएगी।
प्रदेश के सहकारिता मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने मार्कफेड अधिकारियों को राज्यभर में उपलब्ध जमीन के उपयोग की ठोस योजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही उज्जैन में स्थित पेट्रोल पंप को दोबारा शुरू करने के लिए भी कहा गया है।
वहीं, को-ऑपरेटिव पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (सीपीपीपी) मॉडल के तहत राज्य में करीब 2,305 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव है। इसके लिए अब तक 19 एमओयू किए जा चुके हैं। प्रस्तावित निवेश में रिलायंस समूह द्वारा 1000 करोड़ रुपये, मैजेस्टिक बासमती राइस रायसेन द्वारा 1000 करोड़ रुपये, आरएम ग्रुप और मशरूम वर्ल्ड द्वारा 100-100 करोड़ रुपये, वी विन लिमिटेड द्वारा 40 करोड़ रुपये, न्यूट्रेलिस कृषि उत्पादक सहकारी समिति नोएडा द्वारा 30 करोड़ रुपये, एग्रीविस्टा एआई द्वारा 25 करोड़ रुपये और सवीर बायोटेक नोएडा द्वारा 10 करोड़ रुपये निवेश की योजना शामिल है।


