शराब कारोबार मौलिक अधिकार नहीं: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सोम डिस्टिलरीज के 8 लाइसेंस निलंबन को ठहराया सही

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शराब कारोबार मौलिक अधिकार नहीं: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सोम डिस्टिलरीज के 8 लाइसेंस निलंबन को ठहराया सही
भोपाल/जबलपुर। मंगलवार को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में सोम डिस्टिलरीज से जुड़ी याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने एक्साइज कमिश्नर द्वारा कंपनी के 8 लाइसेंस निलंबित करने की कार्रवाई को पूरी तरह वैध माना।
जस्टिस विवेक अग्रवाल की बेंच ने 32 पन्नों के विस्तृत आदेश में साफ कहा कि शराब का व्यापार कोई मौलिक अधिकार नहीं है। इसलिए नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई करना कानून के दायरे में आता है।
लाइसेंस निलंबन का मामला
एक्साइज विभाग ने 4 फरवरी 2026 को Som Distilleries Pvt. Ltd. और Som Distilleries and Breweries Pvt. Ltd. के कुल 8 लाइसेंस सस्पेंड कर दिए थे। यह कार्रवाई 26 फरवरी 2024 को जारी शो-कॉज नोटिस के आधार पर की गई, जिसमें फर्जी परमिट के जरिए शराब परिवहन के गंभीर आरोप लगाए गए थे।
कंपनियों की दलील
कंपनियों ने कोर्ट में कहा कि यह नोटिस 2023-24 की अवधि से जुड़ा था और 31 मार्च 2024 को पुराने लाइसेंस खत्म हो चुके थे। ऐसे में नए लाइसेंस जारी होने के बाद पुराने नोटिस के आधार पर कार्रवाई को उन्होंने अवैध बताया।
सरकार का पक्ष
राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता हरप्रीत सिंह रूपराह और शासकीय अधिवक्ता मानस मणि वर्मा ने दलील दी कि एक्साइज एक्ट के तहत विभाग को कार्रवाई का पूरा अधिकार है और नियमों का पालन अनिवार्य है।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि शराब का कारोबार पूरी तरह सरकारी नियंत्रण में आता है। इसलिए नियमों के उल्लंघन पर लाइसेंस को निलंबित या रद्द करना पूरी तरह वैध है।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि शो-कॉज नोटिस किसी निश्चित अवधि तक सीमित नहीं होता। यदि आरोप गंभीर हों तो बाद में भी कार्रवाई की जा सकती है और पुराने उल्लंघन नए लाइसेंस पर असर डाल सकते हैं।
धोखाधड़ी पर सख्त रुख
फैसले में कहा गया कि यदि किसी मामले में धोखाधड़ी साबित हो जाती है, तो बाकी कानूनी दलीलें कमजोर पड़ जाती हैं। कोर्ट ने माना कि डिस्टिलिंग, ब्रूइंग और बॉटलिंग जैसी गतिविधियों में गंभीर गड़बड़ी पाए जाने पर व्यापक कार्रवाई करना उचित है।
अदालत ने यह भी कहा कि यह पूरा फैसला “प्रोपोर्शनैलिटी टेस्ट” पर खरा उतरता है, यानी कार्रवाई अपराध की गंभीरता के अनुरूप है।

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