विश्वविद्यालय में हर्बल औषधि विकास में एआई की चुनौतियों और संभावनाओं पर राष्ट्रीय सम्मेलन

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विश्वविद्यालय में हर्बल औषधि विकास में एआई की चुनौतियों और संभावनाओं पर राष्ट्रीय सम्मेलन

सागर। डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर के फार्मास्यूटिकल साइंसेस विभाग द्वारा विश्वविद्यालय परिसर स्थित अभिमंच सभागार में “हर्बल औषधि विकास में एआई की चुनौतियों और संभावनाओं” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों, वैज्ञानिकों, शिक्षकों, शोधार्थियों तथा विद्यार्थियों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर हर्बल औषधि अनुसंधान और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के समन्वय पर अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम के संरक्षक विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. यशवंत सिंह ठाकुर रहे। सम्मेलन का आयोजन डीन ईएटी प्रो. अस्मिता गजभिये के मार्गदर्शन में किया गया। कार्यक्रम के संयोजक एवं अध्यक्ष तथा फार्मास्यूटिकल साइंसेस विभागाध्यक्ष प्रो. उमेश के. पाटिल रहे। सम्मेलन के आयोजन सचिव प्रो. सुशील काशव तथा सह-संयोजक प्रो. वंदना सोनी ने आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक सरस्वती पूजन एवं अतिथियों के स्वागत के साथ हुई। इस अवसर पर उपस्थित विशिष्ट अतिथियों एवं विशेषज्ञ वक्ताओं ने हर्बल औषधि विकास में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की बढ़ती भूमिका, नई संभावनाओं तथा चुनौतियों पर अपने विचार व्यक्त किए।
सम्मेलन में डीओपीएस के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. वी. के. दीक्षित, क्रांतिसूर्य टंट्या भील विश्वविद्यालय खरगौन के कुलपति प्रो. एम.एल. कोरी, एमआरएस पंजाव टेक्निकल विश्वविद्यालय बठिंडा के आईक्यूएसी डायरेक्टर प्रो. आशीष बल्दी, एच एन बी गरवाल विश्वविद्यालय उतराखंड से प्रो. अजय नामदेव तथा डी बी टी आई एल एस भुबनेश्वर के बैज्ञानिक डॉ. अंशुमान दीक्षित ने अपने व्याख्यानों के माध्यम से हर्बल औषधि अनुसंधान, आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।
सम्मेलन के तकनीकी सत्रों में प्रतिभागियों को ओरल प्रेजेंटेशन एवं पोस्टर प्रेजेंटेशन के माध्यम से अपने शोध कार्य प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान किया गया, जिससे वैज्ञानिक चर्चा और ज्ञान के आदान-प्रदान का उत्कृष्ट वातावरण बना। सम्मेलन के सफल आयोजन में डॉ. धमेंद्र जैन, डॉ. विकास जैन, डॉ. प्रशांत केशरवानी, डॉ. आदर्श साहू, डॉ. प्रशांत साहू, डॉ. अंकित गणेशपुरकर, डॉ. मुकेश कुमावत, डॉ. तुकाराम हर करनवाड, डॉ. दत्ता एम. पावडे तथा डॉ. आयुष जैन सहित आयोजन समिति के सदस्यों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
समापन अवसर पर आयोजकों ने सभी अतिथियों, वक्ताओं, प्रतिभागियों और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। यह राष्ट्रीय सम्मेलन हर्बल औषधि अनुसंधान एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के समन्वय को बढ़ावा देने और वैज्ञानिकों के बीच ज्ञान के आदान-प्रदान के लिए एक महत्वपूर्ण मंच सिद्ध हुआ।

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