योग भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है, जो वृत्तियों को शांत कर हमें स्वयं से जोड़ती है। – डाॅ प्रतिभा तिवारी, प्रदेश अध्यक्ष भारतीय स्त्री शक्ति

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योग भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है, जो वृत्तियों को शांत कर हमें स्वयं से जोड़ती है। – डाॅ प्रतिभा तिवारी, प्रदेश अध्यक्ष भारतीय स्त्री शक्ति

सागर। भारतीय स्त्री शक्ति सागर एवं महिला पतंजलि योग समिति सागर के संयुक्त तत्वावधान में दिनांक 02/02/2026 को “प्रान्तीय महिला सम्मेलन” के अवसर पर “योग आधारित षिक्षा विद्यार्थी जीवन के परिप्रेक्ष्य में” विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसका शुभारंभ दीप प्रज्जवलन एवं अतिथियों के आदर सत्कार के साथ हुआ। तदोपरांत मुख्य अतिथि, भारतीय स्त्री शक्ति की प्रदेश अध्यक्ष-डाॅ0 प्रतिभा तिवारी ने कहा कि- योग भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है, जो वृत्तियों को शांत कर हमें स्वयं से जोड़ती है। योग आधारित शिक्षा का अर्थ यह नहीं है कि हम केवल कक्षा में योग कराएं, बल्कि इसका अर्थ है-शिक्षा को संस्कार और स्वास्थ्य से जोड़ना। यदि हम एक स्वस्थ और समर्थ भारत चाहते हैं, तो हमें योग को अपने पाठ्यक्रम का अभिन्न हिस्सा बनाना ही होगा। योग हमें हार सहना और विपरीत परिस्थितियों में शांत रहना सिखाता है।

जब योग आधारित शिक्षा हमारे जीवन का आधार बनेगी, तभी ‘‘पढ़ेगा भारत और बढ़ेगा भारत’’। जब शरीर स्वस्थ और मन शांत होता है, तो आत्मविष्वास अपने आप बढ़ जाता है। बुद्धि का विकास तब तक अधूरा है, जब तक मन शांत न हो। आज हर व्यक्ति मानसिक तनाव, एकाग्रता की कमी और भविष्य की अनिश्चितता से भी जूझ रहे है। ऐसे में योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि एक संपूर्ण जीवन पद्धति है।

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता, महिला पतंजलि योग समिति, हरिद्वार की केन्द्रीय प्रभारी-परम पूज्य साध्वी देव अदिति ने कहा कि- जब हम ‘भारतीय स्त्री शक्ति‘ के परिप्रेक्ष्य में योग आधारित शिक्षा की बात करते हैं, तो यह केवल स्वास्थ्य की बात नहीं, बल्कि ‘सशक्तिकरण‘ की बात है। योग केवल लचीलापन नहीं, बल्कि शक्ति भी देता है। यह हमारे जीवन में आत्मविश्वास भरता है ताकि हम हर चुनौतियों का सामना कर सकें। योग मार्गदर्शिका बताती है कि योग से आत्म-बल बढ़ता है। योग हमें सिखाता है कि स्वयं को सशक्त बनाना कितना महत्वपूर्ण है। शिक्षा केवल वह नहीं जो ‘अंक’ दिलाए, बल्कि वह है जो ‘आत्मबोध’ कराए। हमें योग को एक कालखंड  के रूप में नहीं, बल्कि एक जीवन शैली के रूप में अपनाना होगा। योग अपनाकर स्वस्थ भारत की दिशा में एक कदम। हमंे कोशिश करना चाहिए कि झूठ का सहारा ना ले हमेषा सच बोलना चाहिए। सनातन का अर्थ है जो हमेषा से है और हमेषा रहेगा। सनातन धर्म एक शाष्वत जीवन दर्शन है, जो समय के साथ नहीं बदलता, बल्कि समय को दिशा देता है। प्राणायाम न केवल श्वास का अभ्यास है, बल्कि स्वस्थ तन, शांत मन और संतुलित जीवन की कुंजी है। कार्यक्रम में अध्यक्षीय उद्बोधन, महिला पतंजलि योग समिति की राज्य प्रभारी-डाॅ. पुष्पांजलि शर्मा ने कहा कि- योग केवल शरीर को मोड़ना नहीं, बल्कि चंचल मन को एक लक्ष्य पर स्थिर करना है। योग आधारित शिक्षा ‘स्थितप्रज्ञ’ होना सिखाती है-यानि जीत में उत्साह और हार में धैर्य। योग नारी को ‘आत्मनिर्भर’ और ‘आत्मविश्वासी’ बनाता है।

योग वह ऊर्जा है जो शारीरिक बाधाओं से ऊपर उठकर अपनी बौद्धिक क्षमताओं को निखारने का बल प्रदान करती है। कार्यक्रम से पूर्व विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया जिसमें उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को गणमान्य अतिथियों द्वारा प्रमाण प्रत्र वितरित कर उनका उत्साह वतर्धन किया गया। कार्यक्रम का आभार ज्ञापन महिला पतंजलि योग समिति की जिला अध्यक्ष-श्रीमती वंदना कटारे द्वारा दिया गया। कार्यक्रम का मंच संचालन श्रीमती अंतिमा शर्मा द्वारा किया गया। इस अवसर पर श्रीमती पार्वती शर्मा, श्रीमती सरस्वती ध्रुवे, डाॅ. सुनीता दीक्षित, आकांक्षा तिवारी, विद्योत्तमा महोबिया, राधा मांझी एवं बड़ी संख्या में महिला पतंजलि योग समिति की महिलाओं ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति देकर कार्यक्रम को सफल बनाया। कार्यक्रम का समापन वन्दे मातरम् गीत के साथ हुआ।

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