सागर के बड़तूमा में श्रद्धा का महाकुंभ: विधायक प्रदीप लारिया के संकल्प से ‘संत रविदास लोक’ बना वैश्विक आस्था का केंद्र
सागर। बुंदेलखंड की पावन धरा बड़तूमा (मकरोनिया) में आज भक्ति, अध्यात्म और सामाजिक समरसता का एक ऐसा अनूठा संगम देखने को मिला, जिसने इतिहास रच दिया। नरयावली विधायक इंजीनियर प्रदीप लारिया के आत्मीय आह्वान पर संत शिरोमणि रविदास जी महाराज की 649वीं जयंती के अवसर पर आयोजित ‘रविदास लोक महोत्सव’ में जन-जन का अटूट विश्वास उमड़ पड़ा। नरयावली विधानसभा सहित पूरे जिले से आए हजारों श्रद्धालुओं और संत समाज की उपस्थिति ने यह सिद्ध कर दिया कि बड़तूमा अब केवल एक स्थान नहीं, बल्कि समरसता का वैश्विक प्रकाश स्तंभ बन चुका है।
भक्तिमय शुभारंभ: संत चरणों में नतमस्तक हुआ जनमानस
कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ दिव्य वातावरण में हुआ। विधायक प्रदीप लारिया ने संत समाज के साथ मिलकर संत रविदास जी के तैलचित्र पर माल्यार्पण कर पुष्पांजलि अर्पित की। दीप प्रज्ज्वलन और धूप की सुंगध के बीच जब संतों की ‘गुरुवाणी’ गूंजी, तो पूरा परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा। रविदास जी के जीवन दर्शन और उनकी साखियों के वाचन ने उपस्थित जनसमूह को आत्मिक शांति और मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।
भाजपा जिलाध्यक्ष श्याम तिवारी का उद्बोधन
भाजपा जिलाध्यक्ष श्री श्याम तिवारी ने संक्षिप्त लेकिन सारगर्भित शब्दों में संत शिरोमणि को नमन करते हुए कहा— “संत रविदास जी ने समाज को जोड़ने का जो मार्ग दिखाया था, आज बड़तूमा की यह पावन धरा उसी मार्ग को प्रशस्त कर रही है। उनके विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने सदियों पहले थे।”
विधायक प्रदीप लारिया का ओजस्वी संबोधन: “सबको साथ लेकर चलना ही मेरा धर्म”
जब विधायक इंजीनियर प्रदीप लारिया मंच पर आए, तो जनता ने करतल ध्वनि से उनका स्वागत किया। उनका भाषण धार्मिक शुचिता और राजनीतिक विजन का एक अद्भुत संगम था। उन्होंने भावुक होते हुए कहा: “बड़तूमा में निर्मित हो रहा यह 100 करोड़ का ‘संत रविदास लोक’ केवल पत्थरों का ढांचा नहीं, बल्कि मेरे जीवन का वह संकल्प है जो अब सिद्धि की ओर बढ़ रहा है। मेरा स्वप्न संत जी के ‘बेगमपुरा’ की परिकल्पना को साकार करना है—एक ऐसा समाज जहाँ कोई दुखी न हो, जहाँ जाति-पांति का भेद न हो। नरयावली का विकास और जन-जन की एकता ही मेरी असली शक्ति है। हम सबको साथ लेकर चलेंगे, क्योंकि सामाजिक बल ही राष्ट्र का असली बल है।”
उन्होंने आगे कहा कि यह स्मारक युवाओं को स्वावलंबन और आत्मज्ञान का मार्ग दिखाएगा और आने वाली पीढ़ियां यहाँ से मानवता की सेवा का पाठ सीखेंगी।
एक स्वप्न, जो बना जन-आंदोलन
विधायक लारिया के प्रयासों से आज बड़तूमा का यह आयोजन एक उत्सव से ऊपर उठकर एक ‘जन-आंदोलन’ बन गया है। कार्यक्रम में विभिन्न सेवा संगठनों और सामाजिक प्रमुखों की सहभागिता ने यह स्पष्ट कर दिया कि प्रदीप लारिया के प्रति जनता का विश्वास अटूट है। उनकी कार्यशैली में जो आत्मीयता है, वह आज महोत्सव के कोने-कोने में दिखाई दे रही थी।
स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हुआ आज का दिन
इस महोत्सव की सफलता ने यह प्रमाणित कर दिया कि जब नेतृत्व में सेवा का भाव और जनता के प्रति समर्पण हो, तो आध्यात्मिक लक्ष्य भी सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बन जाते हैं। बड़तूमा अब एक ऐसी ऊर्जा स्थली बन चुका है, जिसकी गूँज पूरे देश में सुनाई देगी।
इस अवसर पर संत कमल दास जी, अर्जुन दास जी, मोतीलाल जी, अहिरवार महापंचायत अध्यक्ष अनिल अहिरवार, मुन्ना लाल ठेकेदार, इंदरलाल निलोने, नपाध्यक्ष मिहीलाल,गंगाराम ठेकेदार,रामू ठेकेदार,मधुकर जाटव,डॉ. परशुराम,भगवानदास मासाब, बाबूलाल रोहित, नरेंद्र रोहित, यशवंत अहिरवार, एचपी लारिया, चंदन, जितेंद्र खटीक, निशांत आठिया, प्रशांत अहिरवार, मंडल अध्यक्ष, पार्षदगण, भाजपा के ज्येष्ठ-श्रेष्ठ पदाधिकारी, मातृशक्ति सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु, संत समाज और क्षेत्रीय नागरिक उपस्थित रहे।



