शासकीय जमीन पर नेता जी और वन अधिकारी पर कब्जे के आरोप, बुलडोजर एक्शन !
छतरपुर। ईशानगर में शासकीय भूमि पर कब्जे का मामला थमने का नाम नहीं ले रहा। अभी स्वामित्व योजना के तहत शासकीय भूमि को अपने नाम दर्ज करवाने के आरोपों का मामला शांत भी नहीं हुआ था कि अब खुले तौर पर अवैध अतिक्रमण कर दर्जनों दुकाने बनाने का मामला सामने आ गया है। तहसीलदार न्यायालय छतरपुर द्वारा जारी स्थान आदेशों ने पूरे क्षेत्र में हलचल मचा दी है।
पटवारी जांच रिपोर्ट के अनुसार ग्राम ईशानगर की शासकीय भूमि (खसरा नंबर 534/1/1 एवं 536) पर 10×10 से 100 वर्गफीट तक अवैध कब्जा पाया गया है। मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 248 के तहत नोटिस जारी कर संबंधित लोगों को जवाब तलब किया गया है।
नामों से बढ़ी सियासी गर्मी
जिन व्यक्तियों पर अतिक्रमण के आरोप हैं, उनमें भाजपा मंडल अध्यक्ष भरत गुप्ता तथा शासकीय कर्मचारी डिप्टी रेंजर जलज मिश्रा का नाम शामिल होने से मामला राजनीतिक रंग ले चुका है। इसके अलावा पर्वत सिंह, देवेन्द्र चोबे, कल्लू चोबे के नाम भी आदेश में दर्ज हैं।
बड़ा सवाल क्या मिल रहा था संरक्षण ?
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि आम नागरिक द्वारा छोटा अतिक्रमण किया जाए तो तत्काल कार्रवाई होती है, लेकिन यहां लंबे समय तक निर्माण और कब्जा कैसे चलता रहा? क्या प्रभावशाली पद और सत्ता से नजदीकी के चलते प्रशासनिक कार्रवाई में ढिलाई बरती गई?
बुलडोजर एक्शन कब ?
अब जनता की मांग है कि अवैध शासकीय अतिक्रमण पर सिर्फ नोटिस जारी करने से काम नहीं चलेगा। प्रशासन को निष्पक्ष और सख्त कार्रवाई करते हुए बुलडोजर चलाकर शासकीय भूमि मुक्त करानी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट संदेश जाए कि कानून सबके लिए समान है।
प्रशासन की अग्निपरीक्षा
तहसीलदार द्वारा स्थान आदेश जारी कर नियत तिथि पर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। चेतावनी दी गई है कि अनुपस्थित रहने या अवैध निर्माण जारी रखने पर बेदखली की कार्रवाई की जाएगी और खर्च संबंधित व्यक्तियों से वसूला जाएगा।
अब देखना यह है कि क्या प्रशासन राजनीतिक दबाव से ऊपर उठकर ठोस कार्रवाई करता है या फिर मामला कागजी नोटिसों तक ही सीमित रह जाएगा। ईशानगर की जनता की नजर अब प्रशासनिक बुलडोजर पर टिकी है।



