स्वेच्छाचारिता और अनुशासनहीनता पर कमिश्नर ने शिक्षक को निलंबित किया
सागर। संभाग कमिश्नर अनिल सुचारी ने शिक्षक द्वारा अपने पदीय दायित्वों में स्वेच्छाचारिता और अनुशासनहीनता पर बरतने पर शिक्षक श्री राम लखन पाराशर को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया है। संयुक्त संचालक लोक शिक्षण, सागर संभाग द्वारा अवगत कराया गया कि लोक शिक्षण संचालनालय के तहत उच्च पद का कार्य सौंपे जाने संबंधी निर्देश जारी किए गए थे। इन निर्देशों की कंडिका 2.3 के अंतर्गत उच्च पद प्रभार की काउंसलिंग में भाग लेने वाले अधिकारियों के लिए गोपनीय चरित्रावली की ग्रेडिंग तथा विभागीय जांच की स्थिति अद्यतन रखना अनिवार्य था।
जांच में पाया गया कि रामलखन पाराशर, मूल पद प्रधानाध्यापक, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय क. 2, टीकमगढ़ (उच्च पद प्रभार व्याख्याता) के विरुद्ध जिला शिक्षा अधिकारी टीकमगढ़ के आदेश दिनांक 13 मार्च 2021 द्वारा विभागीय जांच संस्थित की गई थी। जांच प्रतिवेदन दिनांक 10 जुलाई 2021 के अनुसार उनके विरुद्ध तीन आरोप आंशिक रूप से प्रमाणित पाए गए थे। इसके बावजूद श्री पाराशर द्वारा 24 सितंबर 2023 को उच्च श्रेणी शिक्षक/प्रधानाध्यापक माध्यमिक शाला से व्याख्याता के उच्च पद प्रभार की काउंसलिंग में भाग लिया गया एवं काउंसलिंग के दौरान प्रतिभागी लोक सेवक के रूप में विद्यालय चयन संबंधी सहमति पत्र पर स्वयं हस्ताक्षर करने के साथ-साथ जिला शिक्षा अधिकारी टीकमगढ़ द्वारा किए जाने वाले प्रतिहस्ताक्षर एवं पदमुद्रा के स्थान पर भी स्वयं के हस्ताक्षर किए गए। इसके फलस्वरूप संचालनालय के आदेश दिनांक 06 अगस्त 2024 द्वारा श्री पाराशर को व्याख्याता हिन्दी के पद पर उच्च पद प्रभार का पदांकन आदेश जारी किया गया।
संयुक्त संचालक लोक शिक्षण, सागर संभाग से प्राप्त प्रस्ताव के अवलोकन एवं परीक्षण के उपरांत श्री राम लखन पाराशर को प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया। उनका यह कृत्य स्वेच्छाचारिता एवं अनुशासनहीनता का द्योतक मानते हुए मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम 3 का उल्लंघन माना गया। फलस्वरूप मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के नियम 09 के अंतर्गत संभाग कमिश्नर श्री अनिल सुचारी ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है।

