गढ़ाकोटा रहस मेले में आएंगे सीएम डॉ मोहन यादव, 26 फरवरी को करेंगे किसान सम्मेलन को संबोधित

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गढ़ाकोटा रहस मेले में आएंगे सीएम डॉ मोहन यादव, 26 फरवरी को करेंगे किसान सम्मेलन को संबोधित

सागर। पूर्व मंत्री और वरिष्ठ विधायक गोपाल भार्गव द्वारा आयोजित गढाकोटा रहस लोकोत्सव मेला में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव मुख्यातिथि के रूप में शामिल होंगे।
मुख्यमंत्री डॉ यादव 26 फरवरी 2026 गुरुवार को दोपहर: 12 बजे गढ़ाकोटा रहस लोकोत्सव में “बुंदेलखंड स्तरीय किसान सम्मेलन, शहरी- ग्रामीण आजीविका समूहों के सम्मेलन को संबोधित करेंगे।
पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव ने बताया कि रहस मेला ऐतिहासिक मेले का आयोजन 26 से 28 फरवरी के बीच किया जा रहा है. यह मेला बुंदेली कला, संस्कृति और परंपरा का एक बड़ा केंद्र है. बुंदेलखंड अंचल की पहचान है। जिसमें हजारों लोग शामिल होते है।

तैयारियों का लिया जायजा और बैठक

पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव ने आगामी 26 फरवरी से आयोजित होने जा रहे तीन दिवसीय रहस मेला लोकोत्सव की तैयारियों एवं व्यवस्थाओं के संबंध में मेला रहस प्रांगण में विधानसभा क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, गणमान्यजनों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों की बैठक ली। बैठक में मेला आयोजन को सुव्यवस्थित, सुरक्षित एवं भव्य स्वरूप प्रदान करने हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश दिए । साथ ही प्रथम पूज्य भगवान गणेश जी का विधिवत पूजन-अर्चन कर मेला कार्यालय का शुभारंभ किया। उन्होंने का कि ईश्वर से प्रार्थना है कि यह लोकआस्था एवं संस्कृति का महोत्सव सफल, सुव्यवस्थित एवं जन-जन के लिए मंगलमय सिद्ध हो।आप सभी क्षेत्रवासियों से आग्रह है कि अधिक से अधिक संख्या में सहभागिता कर इस लोकपर्व को ऐतिहासिक बनाएं।

दिव्यांग प्रमाण पत्र बनाने और सहायक उपकरण वितरण के लिए शिविर लगाया जाएगा

गढाकोटा में 26 से 28 फरवरी तक आयोजित रहस मेले में दिव्यांग प्रमाण पत्र बनाने और सहायक उपकरण वितरण के लिए शिविर लगाया जाएगा। जिला मेडीकल बोर्ड द्वारा दिव्यांग प्रमाण पत्र बनाए जाएंगे, जबकि एलिम्को जबलपुर द्वारा ट्रायसाईकिल, बैसाखी, मोटराइज्ड ट्रायसाईकिल, श्रवण यंत्र आदि सहायक उपकरण वितरित किए जाएंगे। आवश्यक दस्तावेजों में समग्र आईडी, आधार कार्ड, पासपोर्ट फोटो, इलाज के दस्तावेज शामिल हैं।

200 साल पुराना मेला

मध्य प्रदेश के सागर जिले के गढ़ाकोटा में आयोजित होने वाला रहस मेला बुंदेलखंड का एक प्रमुख 218 वर्ष से अधिक पुराना ऐतिहासिक और सांस्कृतिक मेला है.

राजा मर्दन सिंह जूदेव के शासनकाल में शुरू हुआ यह मेला बसंत पंचमी से रंग पंचमी तक सुनार नदी के किनारे लगता है। पूर्व मंत्री और क्षेत्रीय विधायक गोपाल भार्गव ने इस मेला की जन उपयोगी बनाकर एक नई पहचान दी है।

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