आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का जोरदार प्रदर्शन
21 मांगों को लेकर एसडीएम कार्यालय पहुंचीं, वेतन बढ़ाने और सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने की मांग
सागर जिले के देवरी में गुरुवार को आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका यूनियन (एटक) ने अपनी लंबित मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और सहायिकाएं रैली के रूप में एसडीएम कार्यालय पहुंचीं और प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री तथा महिला एवं बाल विकास मंत्री के नाम नायब तहसीलदार आरके चौधरी को ज्ञापन सौंपा।
प्रदर्शनकारियों ने सरकार से उन्हें नियमित सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने की मांग की। ज्ञापन में कहा गया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता का न्यूनतम मासिक वेतन 35 हजार रुपए और सहायिका का 30 हजार रुपए किया जाए। वर्तमान में उन्हें लगभग 15 हजार रुपए मानदेय मिलता है, जिससे परिवार का भरण-पोषण करना कठिन हो रहा है।
पोषण ट्रैकर ऐप और मोबाइल की शिकायत
यूनियन ने पोषण ट्रैकर ऐप को लेकर गंभीर आपत्ति जताई। कार्यकर्ताओं का कहना है कि ऐप अक्सर ठीक से काम नहीं करता, जिससे कामकाज प्रभावित होता है। शासन की ओर से दिए गए मोबाइल फोन और सिम की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए गए। उनका आरोप है कि उपकरण निम्न स्तर के हैं, जिससे डाटा अपलोड करने और रिपोर्टिंग में दिक्कतें आती हैं।
बीमा, ग्रेच्युटी और पदोन्नति की मांग
ज्ञापन में श्रम विरोधी संहिता वापस लेने और पुराने कानून लागू करने की मांग भी शामिल है। कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को सरकारी कर्मचारी घोषित करने के साथ मृत्यु की स्थिति में 1 करोड़ रुपए का बीमा और परिजनों को अनुकंपा नियुक्ति देने की मांग की गई है। इसके अलावा, सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार ग्रेच्युटी अधिनियम के तहत भुगतान और हर पांच वर्ष में पदोन्नति देने की बात भी उठाई गई।
सेवानिवृत्ति और पेंशन से जुड़े प्रस्ताव
यूनियन ने मांग की है कि सहायिका से कार्यकर्ता और कार्यकर्ता से सुपरवाइजर सहित उच्च पदों पर पदोन्नति का स्पष्ट प्रावधान हो। आंगनबाड़ी मिनी केंद्र से मेन कार्यकर्ता बनने पर पूरा मानदेय दिया जाए। सेवानिवृत्ति की आयु 65 वर्ष तय करने, प्रतिवर्ष 40 दिन का अवकाश देने, पीएफ कटौती लागू करने और रिटायरमेंट के बाद 20 हजार रुपए प्रतिमाह पेंशन सुनिश्चित करने की मांग भी ज्ञापन में शामिल है।
साथ ही 3 से 6 माह तक के बच्चों की प्रारंभिक देखभाल और शिक्षा के लिए पर्याप्त बजट एवं व्यवस्था कर इसे नोडल एजेंसी बनाने की बात कही गई है।
फेस आईडी से राशन वितरण पर आपत्ति
कार्यकर्ताओं ने नई शिक्षा नीति को वापस लेने और पोषण ट्रैकर ऐप बंद करने की मांग दोहराई। उनका कहना है कि फेस कैप्चर, फेस आईडी और ओटीपी के जरिए हितग्राहियों को ‘टेक होम राशन’ वितरित करना व्यवहारिक नहीं है। ऐप अंग्रेजी भाषा में होने से भी त्रुटियां होती हैं, जिससे कार्य प्रभावित होता है। उन्होंने शासन से जल्द समाधान निकालने की मांग की।
ये रहीं मौजूद
प्रदर्शन के दौरान जिला अध्यक्ष सूरज लोधी, निशा कुर्मी, निधि तिवारी, रागनी जैन, पीतांबरी तिवारी, रजनी अरेले, राजेश्वरी दुबे, शकुंतला चौबे, मंजू रानी, पूनम कोरी, रंजना चौरसिया सहित अन्य आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं उपस्थित


