सागर। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी हिमांशु पालीवाल लिंक कोर्ट राहतगढ़ ने आबकारी एक्ट के एक मामले में विदिशा के लाइसेंसी आबकारी ठेकेदार जंडेल सिंह गुर्जर को बड़ी राहत दी है। न्यायालय ने पुलिस द्वारा प्रस्तुत अंतिम प्रतिवेदन (चार्जशीट) को अस्वीकार करते हुए ठेकेदार को प्रकरण से मुक्त करने का आदेश किया है।
ठेकेदार की गैरमौजूदगी में दर्ज हुआ था मामला
घटनाक्रम के अनुसार, राहतगढ़ पुलिस ने 14 मई 2025 को एक चार पहिया वाहन से अवैध रूप से शराब की ढुलाई करते हुए 2-3 युवकों को पकड़ा था। पुलिस ने पूछताछ के दौरान पकड़े गए आरोपियों के बयानों के आधार पर पुलिस ने विदिशा के आबकारी ठेकेदार जंडेल सिंह गुर्जर को भी सह-आरोपी बनाया था। पुलिस ने उनके विरुद्ध आबकारी एक्ट की धारा 34(2) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।
कोर्ट में बचाव पक्ष के तर्क
ठेकेदार जंडेल सिंह की ओर से विद्वान अधिवक्ता अमित गोस्वामी ने प्रभावी पैरवी की। उन्होंने अदालत के समक्ष तर्क दिया कि जंडेल सिंह एक अधिकृत शासकीय लाइसेंसी आबकारी ठेकेदार हैं। उनके पास विदिशा जिले के ग्यारसपुर क्षेत्र के सी.एस.-2 अटारी खेजड़ा का वैध लाइसेंस (नंबर 52/2025/0074) मौजूद है, जो 31 मार्च 2026 तक प्रभावी है। अधिवक्ता गोस्वामी ने कानून का हवाला देते हुए कहा कि म.प्र. आबकारी अधिनियम 1915 की धारा 61 के अनुसार, यदि किसी लाइसेंसी ठेकेदार के विरुद्ध आबकारी नियमों के उल्लंघन का मामला बनता है, तो उस पर संज्ञान केवल तभी लिया जा सकता है जब कलेक्टर या उनके द्वारा अधिकृत आबकारी अधिकारी द्वारा लिखित शिकायत या रिपोर्ट प्रस्तुत की गई हो। इस मामले में पुलिस ने सीधे कार्रवाई की थी, जो कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन था।
न्यायालय ने पुलिस प्रतिवेदन और कार्यवाही को त्रुटिपूर्ण माना
न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी हिमांशु पालीवाल ने बचाव पक्ष के तर्कों से सहमति जताई। कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि चूंकि अभियुक्त एक लाइसेंसी ठेकेदार है और उसके विरुद्ध कलेक्टर स्तर से कोई वैध अभियोजन स्वीकृति या रिपोर्ट पेश नहीं की गई थी, इसलिए पुलिस द्वारा प्रस्तुत अंतिम प्रतिवेदन के आधार पर अपराध का संज्ञान नहीं लिया जा सकता।
न्यायालय ने पुलिस की रिपोर्ट को अस्वीकार करते हुए जंडेल सिंह गुर्जर को इस प्रकरण से मुक्त करने का आदेश दिया। हालांकि, मामले के अन्य आरोपियों के विरुद्ध प्रकरण की सुनवाई जारी रहेगी।

