मध्यस्थता का लाभ पक्षकारों तक पहुँचाना न्यायाधीश एवं अधिवक्ताओं का परम कर्तव्य – न्यायमूर्ति

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मध्यस्थता का लाभ पक्षकारों तक पहुँचाना न्यायाधीश एवं अधिवक्ताओं का परम कर्तव्य – न्यायमूर्ति
सागर। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय जबलपुर के माननीय न्यायमूर्ति जस्टिस द्वारकाधीश बंसल की गरिमामयी उपस्थिति में जिला न्यायालय सागर स्थित ए.डी.आर. भवन में मध्यस्थता जागरूकता सह विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि माननीय न्यायमूर्ति ने मध्यस्थता विषय पर जिला न्यायालय में पदस्थ न्यायाधीशों, अधिवक्ताओं एवं विभिन्न विभागों के अधिकारियों-कर्मचारियों को संबोधित किया।
माननीय न्यायमूर्ति ने अपने उद्बोधन में कहा कि मध्यस्थता का लाभ पक्षकारों तक पहुँचाना न्यायाधीशों एवं अधिवक्ताओं का परम कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि प्रकरणों में सदैव सुलह-समझौते की संभावना तलाशनी चाहिए तथा यह प्रयास होना चाहिए कि मामलों का निराकरण पक्षकारों के बीच आपसी राजीनामे से हो, जिससे उनके संबंध भविष्य में मधुर बने रहें और समाज में शांति बनी रहे। उन्होंने अपने अधिवक्ता जीवन के दौरान मध्यस्थता से सुलझाए गए कई प्रकरणों के उदाहरण भी प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए माननीय न्यायमूर्ति ने अधिवक्ता व्यवसाय में पदार्पण कर रहे नवागत अधिवक्ताओं को मार्गदर्शन देते हुए कहा कि न्यायालय के समक्ष पक्ष रखते समय विधिक ज्ञान, प्रभावी तर्क एवं शालीन व्यवहार से पक्ष प्रस्तुत करें, जिससे पक्षकारों को न्याय मिल सके और अधिवक्ताओं की पहचान भी स्थापित हो।
इस अवसर पर प्रधान जिला न्यायाधीश एम.के. शर्मा ने माननीय न्यायमूर्ति का स्वागत करते हुए वर्ष 2025 में किए गए वार्षिक कार्य एवं गतिविधियों की जानकारी प्रस्तुत की।
कार्यक्रम को म.प्र. राज्य अधिवक्ता संघ की को-चेयरपर्सन रश्मि रितु जैन, जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह राजपूत एवं सचिव श्री वीरेन्द्र सिंह राजपूत ने भी संबोधित किया। आभार प्रदर्शन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव श्री अंकित श्रीवास्तव द्वारा किया।

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