थकान से धड़कन तक: थायरॉइड के लक्षणों पर IMA सागर का जागरूकता अभियान
सागर। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) सागर एवं स्वास्थ्य विभाग सागर के संयुक्त तत्वावधान में सीएचसी गड़ाकोटा में राष्ट्रीय थाइरोइड जागरूकता माह के अवसर पर शिविर का आयोजन किया गया।थायरॉइड जागरूकता माह आम जनता को यह समझाने का एक बेहतरीन प्रयास है कि थायरॉइड से संबंधित हार्मोनल समस्याएं कई तरह के लक्षण पैदा कर सकती हैं।
शिविर में वरिष्ठ मेडिकल स्पेशलिस्ट डॉ जितेन्द्र सर्राफ ने बताया के अनुमानित तौर पर 4 करोड़ भारतीय थायरॉइड विकारों से प्रभावित हैं, जिनमें से कई मामलों का निदान नहीं हो पाता क्योंकि लक्षण अक्सर हल्के होते हैं या उन्हें तनाव या बढ़ती उम्र जैसी अन्य स्थितियों के लक्षण समझ लिया जाता है। थायरॉइड हार्मोन शरीर की सारी रासायनिक प्रक्रियाएँ जो कोशिकाओं में लगातार होती हैं, जिससे भोजन ऊर्जा में बदलता है और शरीर के सभी कार्य (साँस लेना, हिलना-डुलना, बढ़ना, ठीक होना) संभव हो पाते हैं, जिसमें भोजन को तोड़ना और नई चीज़ें बनाना शामिल है, जो जीवन और स्वस्थ रहने के लिए ज़रूरी है.
आईएमए अध्यक्ष डॉ तल्हा साद ने बताया के महिलाओं में पुरुषों की तुलना में थायरॉइड की समस्या होने की संभावना 5 से 8 गुना अधिक होती है, और लगभग 8 में से 1 महिला को अपने जीवनकाल में थायरॉइड की समस्या हो सकती है।
उन्होंने बताया के लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि थायरॉइड अतिसक्रिय (हाइपरथायरायडिज्म) है या अल्पसक्रिय (हाइपोथायरायडिज्म)।हाइपोथायरायडिज्म (अल्पसक्रिय): लक्षणों में थकान, वजन बढ़ना, ठंड लगना, शुष्क त्वचा, बालों का झड़ना, अवसाद और अनियमित मासिक धर्म शामिल हो सकते हैं।जबकि हाइपरथायरायडिज्म (अतिसक्रिय): लक्षणों में तेज़ हृदय गति, भूख बढ़ने के बावजूद वजन कम होना, चिंता, अनिद्रा और गर्मी के प्रति संवेदनशीलता शामिल हो सकते हैं।
उन्होंने बताया के साधारण रक्त परीक्षण (जैसे टीएसएच परीक्षण) के माध्यम से समय पर इसकी जांच की जा सकती है और निदान संभव है।
इस अवसर पर बीएमओ डॉ सुयश सिंघाई , डॉ साक्षी सिंघाई ,नर्सिंग स्टाफ, आशा कार्यकर्ता तथा बड़ी संख्या में आमजन की सहभागिता ने कार्यक्रम को सफल बनाया.

