थैले में मिली बच्ची अब पूरी तरह स्वस्थ, मासूम धड़कनों को BMC के डॉक्टर्स और नर्स की ममता ने दिया नया जीवन

 

सागर। बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर्स , नर्स और स्टाफ ने एक अनोखी मिसाल पेश करते हुए दो दिन की अज्ञात नवजात को नया जीवन देने का नेक कार्य किया है। हम बात कर रहे हैं केसली पुलिस द्वारा थैले में मिली एक बच्ची की जिसे पुलिस द्वारा मेडिकल कॉलेज लाने के बाद बीएमसी के डॉक्टर्स , स्टाफ ने तत्काल संज्ञान में लिया और अपने परिवार के सदस्य की भांति उसकी देखरेख की।

नवजात जब 2 दिन की थी तब बीएमसी पहुंची। उसकी हालत गंभीर थी, वजन कम, शरीर कमजोर था। उसके शरीर में मानो कोई जान नहीं थी, उसके शरीर से बदबू भी आ रही थी। बच्ची का रोना भी बहुत ही कमजोर और धीमा था। डॉक्टर ने बच्ची को तत्काल एनआईसीयू में भर्ती किया और पुनर्जीवित किया। डॉक्टर्स का कहना था कि बच्ची की हालत इतनी कमजोर थी कि वह सही से दूध भी नहीं पी पा रहा रही थी उसका शरीर ठंडा एवं नीला था।

मीडिया प्रभारी डॉक्टर सौरभ जैन ने बताया कि भर्ती करने के बाद डॉक्टर की देखरेख में धीरे–धीरे बच्ची की हालत स्थिर हुई। चूंकि बच्ची की मां का पता नहीं था और बच्ची अज्ञात होने की वजह से उसे मां का दूध भी प्राप्त नहीं हो पा रहा था अतः डॉक्टर्स , सिस्टर्स ने ही फॉर्मूला मिल्क के डिब्बे मंगवाए और उसे केएमसी अर्थात कंगारू मदर केयर भी दी। केएमसी के तहत समय-समय पर बच्ची को त्वचा से त्वचा संपर्क बनाकर कंगारू मदर केयर प्रदान की गई। इसी प्रकार बच्ची के लिए आवश्यक कपड़े भी शिशु रोग विभाग की नर्स, डॉक्टर ने मंगाए।
बच्ची के लिए एक डेडीकेटेड वार्मर अरेंज किया जिससे कि उसे किसी भी प्रकार का इन्फेक्शन ना हो।

डॉक्टर्स का कहना था कि इस सबके बावजूद भी उन्हें एक और चुनौती का सामना करना पड़ा जिसमें बच्ची को एनआईसीयू से वार्ड में शिफ्ट करने पर उसकी देखरेख का प्रश्न था कि कौन अब वार्ड में बच्ची की जिम्मेदारी से देखरेख करेगा। इस पर डॉक्टर्स और नर्स ने ही जिम्मेदारी लेते हुए एक एक करके उसका उसका ख्याल रखा, उसे नहलाया, उसे दूध पिलाया तथा दैनिक रूप से आवश्यक सभी कार्य किये।

उसे क्रॉस इन्फेक्शन रिस्क से बचाने के लिए भीड़ वाले क्षेत्र में नहीं रखा। धीरे-धीरे बच्चों की हालत में सुधार होता गया और उसने अब अच्छी तरह से दूध पीना भी शुरू किया और इस प्रकार बच्ची का वज़न भी बढ़ने लगा।

शिशु रोग विभाग की एचओडी डॉक्टर शालिनी हजेला ने बताया कि बच्ची की हालत में पूर्ण रूप से सुधार आने के बाद अब सभी के सामने एक और चुनौती खड़ी थी कि बच्ची को किसके सुपुर्द किया जाए? जिस पर डीन डॉक्टर पीएस ठाकुर के मार्गदर्शन एवं प्रयास से बाल कल्याण समिति एवं मातृ छाया शिशु गृह से समन्वय स्थापित कर बच्ची के सर्वोत्तम हित को देखते हुए बच्ची को मातृ छाया शिशु गृह को सुपुर्द किया गया।
बच्ची को सुपुर्द करने की प्रक्रिया के दौरान डीन डॉ पीएस ठाकुर, अधीक्षक डॉ राजेश जैन, शिशु रोग विभाग के डाक्टर्स , स्टाफ आदि उपस्थित थे।

डीन डॉ पी एस ठाकुर ने इस कार्य के लिए सभी डॉक्टर्स , स्टाफ को शुभकामनाएं देते हुए भविष्य में भी मानव हित से जुड़े कार्य करते रहने की प्रेरणा दी और कहा कि हमने डॉक्टर्स की प्रथम जिम्मेदारी है कि हम सभी मानवहित की दिशा में सतत् कार्य करें।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here