संसद के शीतकालीन सत्र में गरमाई राजनीति: लोकसभा में चुनाव सुधारों पर बहस, राज्यसभा में ‘वंदे मातरम्’ पर टकराव

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संसद के शीतकालीन सत्र में गरमाई राजनीति: लोकसभा में चुनाव सुधारों पर बहस, राज्यसभा में ‘वंदे मातरम्’ पर टकराव

नई दिल्ली। संसद के शीतकालीन सत्र के आठवें दिन लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदन राजनीतिक बहसों से सराबोर रहे। लोकसभा में चुनाव सुधार और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर विपक्ष और सत्ता पक्ष में जोरदार तकरार देखने को मिली, वहीं राज्यसभा में ‘वंदे मातरम्’ को लेकर लंबी बहस छिड़ी रही।

लोकसभा में विपक्ष के कई सांसदों ने एक बार फिर बैलेट पेपर की वापसी की मांग उठाई और ईवीएम को हटाने की बात कही। सदस्यों ने SIR प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। इन बिंदुओं का जवाब गृह मंत्री अमित शाह ने विस्तृत रूप से दिया। बाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शाह के भाषण की प्रशंसा करते हुए एक वीडियो साझा किया और लिखा कि गृह मंत्री ने तथ्यों के आधार पर चुनाव प्रणाली के विभिन्न पहलुओं और लोकतंत्र की मजबूती को स्पष्ट किया है तथा विपक्ष के “झूठ” का भी पर्दाफाश किया है।

चर्चा के दौरान शिरोमणि अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल ने राजनीतिक दलों को कटघरे में खड़ा कर दिया। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रचार के दौरान सभी पार्टियां ऐसे वादे करती हैं, जिन्हें पूरा करने का इरादा ही नहीं होता। उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि आम आदमी पार्टी महिलाओं को एक हजार रुपये देने की बात करती है और कांग्रेस हर व्यक्ति को नौकरी देने का दावा करती है, जबकि दोनों जानते हैं कि यह संभव नहीं है।

सत्र के दौरान विपक्ष और सरकार के बीच टकराव के संकेत साफ दिखाई दिए। कांग्रेस के सांसद केसी वेणुगोपाल ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए तो बीजेपी सांसद रविशंकर प्रसाद ने पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस जब जीतती है तब चुनाव आयोग उन्हें सही लगता है और जब हारती है तो वही आयोग पक्षपाती नजर आता है।

सूत्रों के अनुसार, लोकसभा में चुनाव सुधारों पर जारी चर्चा के बीच गृह मंत्री अमित शाह शाम को बिहार में लागू किए गए सुधारों, मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (SIR) और अवैध घुसपैठियों से जुड़े मुद्दों पर सरकार का पक्ष विस्तार से रखेंगे। उधर राज्यसभा में बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा दोपहर एक बजे के आसपास ‘वंदे मातरम्’ विषय पर पार्टी की स्थिति प्रस्तुत करेंगे।

सत्र का यह दिन दोनों सदनों में तीखी बहसों और राजनीतिक वाद-विवाद का गवाह रहा।

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