डॉ. अंबेडकर ने संविधान के माध्यम से मानवाधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की

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डॉ. अंबेडकर ने संविधान के माध्यम से मानवाधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की

सागर । डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर के डॉ. अंबेडकर चेयर में आयोजित मानवाधिकार दिवस के अवसर पर डॉ,देवेंद्र कुमार ने संबोधित करते हुए कहा कि डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर को भारत में मानवाधिकारों के सबसे बड़े संरक्षक के रूप में जाना जाता है । उनका पूरा जीवन सामाजिक न्याय, समता और मानवीय गरिमा को स्थापित करने के संघर्ष को समर्पित था । डॉ. अम्बेडकर ने भारतीय संविधान को आधुनिक मानवाधिकार के रूप में प्रस्तुत किया। डॉ. अंबेडकर ने महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष, संपत्ति का अधिकार, विवाह- तलाक के अधिकार और शिक्षा के लिए संघर्ष किया| बिना आर्थिक समानता के मानवाधिकार अधूरा है । उन्होंने कहा कि मानवाधिकार दिवस हर वर्ष 10 दिसंबर को विश्व में मनाया जाता है । यह दिन संयुक्त राष्ट्र द्वारा 1948 में पारित मानवाधिकारों की घोषणा के रूप में पूरा विश्व मानता है । भारत में मानव अधिकार के जनक के रूप में डॉ,अंबेडकर का नाम सबसे महत्वपूर्ण है। डॉ अंबेडकर ने महिलाओं और सभी वंचित वर्गों के सम्मान के अधिकारों के लिए आजीवन संघर्ष किया और संविधान में उनके अधिकारियों को दिलाने के लिए विशेष प्रयास किया। आज भारतीय संविधान का हृदय और आत्मा मानवाधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करना है, इस अवसर पर उमेश चढार, जितेंद्र कुमार, हिमांशु आर्य, अभय कुमार,डॉ, हेम कुमारी कुर्मी आदि उपस्थित रहे । सभी के द्वारा डॉ. अंबेडकर के चित्र पर पुष्प अर्पित कर मानवाधिकार के विषय पर अपने विचार रखें ।

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