MP News : मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरी की भर्ती प्रक्रिया को झटका देने वाले बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ है। एसटीएफ (स्पेशल टास्क फोर्स) ने उन लोगों पर शिकंजा कस दिया है, जिन्होंने माध्यमिक शिक्षा मंडल के नाम पर बनाए गए फर्जी डीएड (D.Ed) अंकसूची का उपयोग कर सरकारी स्कूलों में शिक्षक की नौकरी हासिल की थी।
जांच में सामने आया कि न केवल अंकसूचियां नकली थीं, बल्कि नियुक्ति के बाद जमा की गई सत्यापन रिपोर्टें भी जालसाजी से तैयार की गई थीं।
कैसे खुला फर्जीवाड़े का जाल?
एसटीएफ को सूचना मिली थी कि कुछ लोग शिक्षक भर्ती में फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर रहे हैं। विशेष पुलिस महानिदेशक पंकज कुमार श्रीवास्तव के निर्देश पर एसपी एसटीएफ राजेश सिंह भदौरिया के नेतृत्व में टीम ने गोपनीय जांच शुरू की।
टीम ने विभिन्न शिक्षा कार्यालयों से दस्तावेज़ मंगवाकर उनकी बारीकी से जांच की। इस दौरान यह स्पष्ट हो गया कि जिन शिक्षकों ने डीएड की मार्कशीट प्रस्तुत की थी, वे माध्यमिक शिक्षा मंडल के रिकॉर्ड से मेल नहीं खा रहीं।
यानि, अंकसूचियां असली नहीं थीं,उन्हें हूबहू कॉपी की तरह तैयार किया गया था।
संगठित गिरोह का भी पर्दाफाश
जांच में एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया, यह फर्जीवाड़ा किसी अकेले व्यक्ति का काम नहीं था।
एसटीएफ ने पता लगाया कि एक संगठित गैंग फर्जी दस्तावेज बनाकर उम्मीदवारों को सरकारी नौकरी दिलाने में सक्रिय था। इस गिरोह ने नकली मार्कशीटें तैयार कीं और फिर उसके आधार पर नौकरी दिलाने तक का पूरा रास्ता साफ किया।
34 शिक्षकों पर केस दर्ज, 8 नामजद आरोपी
एसटीएफ ने अब तक 34 शिक्षकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। इनमें 8 लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया है।
जिन पर केस दर्ज किया गया है, उनमें शामिल हैं:
गंधर्व सिंह रावत
साहब सिंह कुशवाह
बृजेश रोरिया
महेंद्र सिंह रावत
लोकेन्द्र सिंह
रूबी कुशवाह
रविंद्र सिंह राणा
अर्जुन सिंह चौहान
ये सभी आरोपी मुरैना, शिवपुरी, ग्वालियर और इंदौर जिलों के सरकारी स्कूलों में तैनात थे।
एसटीएफ क्या कह रहा है?
एसपी एसटीएफ ग्वालियर, राजेश सिंह भदौरिया ने बताया कि जांच में यह साफ साबित हुआ है कि कई लोगों ने पूरी तरह नकली डीएड अंकसूचियां बनवाकर शिक्षक पद पर नियुक्ति प्राप्त की।
उन्होंने कहा—
नियुक्ति के बाद जमा की गई सत्यापन रिपोर्ट भी फर्जी पाई गई है। हमारी टीम इस गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान कर रही है और जल्द ही और कार्रवाई होगी।
आगे की कार्रवाई
एसटीएफ अब:
गैंग के अन्य सदस्यों तक पहुंचने
दस्तावेज बनाने वालों की भूमिका तलाशने
और अधिकारियों की संभावित मिलीभगत की जांच करने पर काम कर रही है।
यह मामला राज्य में शैक्षणिक भर्ती प्रक्रिया की निगरानी और सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल भी खड़ा करता है।

