आईएमए सागर का टीबी उन्मूलन की दिशा में बड़ा कदम: सिहोरा पीएचसी में विशाल स्वास्थ्य शिविर का आयोजन
सागर। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) सागर शाखा तथा स्वास्थ्य विभाग सागर के संयुक्त तत्वावधान में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सिहोरा में टीबी की प्रारंभिक पहचान एवं उपचार हेतु एक दिवसीय मेगा स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में ट्रूनाट (TruNaat) जांच, पोर्टेबल डिजिटल चेस्ट एक्स-रे तथा मौके पर ही पुष्टि हुए मरीजों का निःशुल्क उपचार प्रारंभ किया गया।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. आरिफ कुरैशी ने बताया के
टीबी पूरी तरह ठीक होने वाली बीमारी है बशर्ते इसका पता जल्दी लगे और पूरा इलाज लिया जाए। देरी से निदान होने पर यह जानलेवा भी हो सकती है। आज ट्रूनाट मशीन से मात्र एक घंटे में टीबी की पुष्टि हो जाती है, जिससे हम तुरंत इलाज शुरू कर सकते हैं।
क्षेत्रीय निदेशक डॉ. नीना गिड़यान ने बुंदेलखंड क्षेत्र में टीबी की स्थिति पर प्रकाश डालते हुए बताया के बुंदेलखंड में टी बी की व्यापकता अभी भी चिंताजनक है। ग्रामीण क्षेत्रों में कुपोषण, धूम्रपान, तंबाकू सेवन और मधुमेह जैसी सह-रुग्णताएँ टीबी के खतरे को कई गुना बढ़ा देती हैं। हमें सामुदायिक स्तर पर जागरूकता और सक्रिय केस फाइंडिंग को तेज करना होगा।”
IMA सागर अध्यक्ष डॉ. तल्हा साद ने जोर देते हुए बताया के
“तंबाकू चबाना, बीड़ी पीना, गुटखा और शराब का सेवन – ये सभी टीबी के सबसे बड़े जोखिम कारक हैं। इसके अलावा मधुमेह और HIV के मरीजों में टीबी होने की संभावना सामान्य व्यक्ति से 3-4 गुना अधिक होती है। इसलिए नियमित शुगर जांच, HIV स्क्रीनिंग और इन नशों से पूर्ण परहेज ही सबसे सस्ता और प्रभावी बचाव है।”
शिविर में लगभग 450 से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग की गई, जिनमें से 28 संदिग्ध मरीजों की ट्रूनाट जांच की गई और 11 नए टीबी मरीजों की मौके पर ही पुष्टि हुई। सभी मरीजों को निःशुल्क दवाइयाँ देकर नीक्षय मित्र योजना से जोड़ा गया। पोर्टेबल डिजिटल एक्स-रे यूनिट की मदद से 180 से अधिक लोगों का चेस्ट एक्स-रे किया गया।
IMA सागर और स्वास्थ्य विभाग ने घोषणा की है कि आगामी महीनों में जिले के अन्य क्षेत्रों में भी इसी तरह के सक्रिय केस फाइंडिंग शिविर आयोजित किए जाएंगे ताकि 2025 तक भारत को टीबी मुक्त करने के प्रधानमंत्री के संकल्प को साकार किया जा सके।
निक्षय मित्र योजना के अंतर्गत दो मरीजों को फ़ूड बास्केट भी वितरित किया गया. डॉ. सुशीला यादव , डॉ मनोज जैन , और बड़ी संख्या में मौजूद नर्सिंग स्टाफ , आशा वर्कर्स और आमजन की मौजूदगी ने सेशन को और प्रभावी बनाया।

