सागर। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) खुरई में बुधवार को राष्ट्रीय निमोनिया उन्मूलन कार्यक्रम साँस के अंतर्गत विश्व निमोनिया दिवस के अवसर पर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन सागर और स्वास्थ विभाग सागर के संयुक्त तत्वावधान से कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य फोकस रहा बच्चों और शिशुओं में निमोनिया का शीघ्र निदान व प्रबंधन ताकि शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) को कम किया जा सके। इस अवसर पर आईएमए के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. जगदीश माहेश्वरी ने बताया कि निमोनिया रोके जाने योग्य बीमारी दुनिया भर में 5 साल से कम उम्र के बच्चों की मौत का सबसे बड़ा संक्रामक कारण है।
भारत में हर साल 1.27 लाख से ज्यादा बच्चे निमोनिया से अकाल काल का शिकार हो जाते हैं। इस दौरान क्षेत्रिय संचालक स्वास्थ्य डॉ. नीना गिडियन ने बताया कि मध्य प्रदेश में आईएमआर (नवजात शिशुओं की मृत्यु) एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। नवीनतम आंकड़ों (एसआरएस 2025, 2023 आधारित) के अनुसार राज्य में प्रति 1 हजार जीवित जन्म पर 43 शिशु मृत्यु दर्ज की गई, जो राष्ट्रीय औसत 25 प्रति 1 हजार से दोगुना है। मध्य प्रदेश इस मामले में देश में शीर्ष पर है। इसका प्रमुख कारण, समय से पहले जन्म, निमोनिया, सेप्सिस और कम वजन पाया गया है। आईएमए सागर के अध्यक्ष डॉ. तल्हा साद के अनुसार मध्य प्रदेश में 15 प्रतिशत आईएमआर में कमी आने के लिए न्यूमोकोकल कंज्यूगेट वैक्सीन जो के भारत सरकार की ओर से मुफ्त में 9 और 14 हफ़्ते और तीसरा डोज़ 9 महीने पर शिशु का टीकाकरण किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त स्तनपान, पोषण और स्वच्छता से मजबूत इम्यूनिटी अहम भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने बताया के बच्चों के अलावा, निमोनिया बुजुर्गों (65़ वर्ष से अधिक) के लिए घातक साबित होता है। अस्पताल में भर्ती बुजुर्ग मरीजों में निमोनिया से मृत्यु दर 10 प्रतिशत से 30 प्रतिशत तक पहुंच जाती है और 75 आयु वालों में यह 32 प्रतिशत तक हो सकती है।
पुरानी बीमारियां (जैसे डायबिटीज या हृदय रोग) जोखिम बढ़ाती हैं। आईएमए सचिव डॉ. रोशी जैन, डॉ. अरविंद सराफ, डॉ. विश्वास सप्रे, डॉ. सुशीला यादव, डॉ. शेखर श्रीवास्तव, डॉ. रामजी ठाकुर, डॉ. शहनाज़ और बड़ी संख्या में मौजूद नर्सिंग स्टाफ, आशा वर्कर्स और आमजन की मौजूदगी ने सेशन को और प्रभावी बनाया।

