Thursday, January 8, 2026

MP में टाइपिंग गलती बनी दर्दभरी कैद की वजह: एक साल जेल में रहने के बाद कहानी हाई कोर्ट तक पहुंची

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लिपिकीय त्रुटि ने बिगाड़ दी जिंदगी, हाई कोर्ट ने दिया मुआवज़े का आदेश

जबलपुर/शहडोल। मध्य प्रदेश के शहडोल जिले के 26 वर्षीय सुशांत बैस की ज़िंदगी एक मामूली प्रशासनिक गलती ने पलटकर रख दी। नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) के तहत हुई उनकी गलत गिरफ्तारी ने न सिर्फ उनका एक साल छीन लिया, बल्कि उनके परिवार को भी गहरे मानसिक और आर्थिक संकट में डाल दिया। सुशांत कहते हैं, “मेरी बेटी को मैंने पहली बार तब देखा था जब वह छह महीने की हो चुकी थी। मेरी ज़िंदगी का सबसे बड़ा दर्द यही है कि उसकी पहली मुस्कान, उसके पहले कदम सब कुछ मैं जेल में रहते हुए मिस कर गया।”

गलत नाम दर्ज होने से शुरू हुई त्रासदी

सुशांत की गिरफ्तारी पिछले साल 4 सितंबर को हुई थी। इस कार्रवाई की वजह थी एक निरोध आदेश, जिस पर शहडोल जिला कलेक्टर केदार सिंह ने हस्ताक्षर किए थे। आदेश तो किसी और आरोपी—नीरजकांत द्विवेदी—के खिलाफ था, लेकिन प्रशासन की टाइपिंग गलती सुशांत पर भारी पड़ गई। शुरुआत में अधिकारियों ने इसे साधारण टंकण त्रुटि बताकर टाल दिया, लेकिन इसी गलती ने सुशांत को 12 महीनों तक जेल में रहने पर मजबूर कर दिया।

एक साल बाद मिली आज़ादी, लेकिन जख्म अभी भी ताज़ा

लंबी कानूनी लड़ाई और परिवार के संघर्ष के बाद इस साल 9 सितंबर को हाई कोर्ट ने सुशांत की रिहाई के आदेश दिए। न्यायालय ने मामले को गंभीर लापरवाही बताते हुए जिला कलेक्टर को अवमानना नोटिस जारी किया और सुशांत को दो लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश भी दिया।

हालांकि सुशांत का कहना है कि यह राहत भी उनके मन का खालीपन नहीं भर पाई। वे बताते हैं,

मेरी बेटी अनाया का जन्म 13 मार्च को हुआ था। मैं उसे तभी देख सका जब जेल से वापस घर आया। मेरी पत्नी ने अकेले यह सब झेला, और मेरे माता-पिता को ऐसे मुकदमे पर पैसा खर्च करना पड़ा जिसे वे समझ तक नहीं पा रहे थे।
सुशांत की अनुपस्थिति में उनकी बेटी ने अपने पहले कदम भी उठा लिए थे। एक ऐसी याद जिसे हर पिता अपने दिल में सहेजना चाहता है, पर सुशांत इसे खो चुके हैं।

नौकरी का भविष्य भी दांव पर

सुशांत बताते हैं कि इस गलत कैद ने उनके करियर को भी नुकसान पहुंचाया है। “मेरी नौकरी की उम्मीदें अब लगभग खत्म हो गई हैं। एक साल की कैद ने मेरे जीवन का सबसे अहम समय छीन लिया,” वे दुख जताते हैं।

हाई कोर्ट ने लगाई फटकार, कहा जांच क्यों नहीं हुई?

मामले पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल और न्यायमूर्ति अवनींद्र कुमार सिंह की खंडपीठ ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन दोनों को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने स्पष्ट कहा कि:

निरोध आदेश जारी करने से पहले प्रशासन ने आवश्यक जांच नहीं की

राज्य शासन ने आदेश को मंजूरी देते समय गंभीर लापरवाही बरती

एक गलत नाम दर्ज करने जैसी त्रुटि से किसी नागरिक का जीवन तहस-नहस हो सकता है

हाई कोर्ट ने इसे नागरिक अधिकारों का गंभीर उल्लंघन बताते हुए पूरी प्रक्रिया की जवाबदेही तय करने की बात कही।

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