मध्य प्रदेश को नहीं मिल रहा ‘डबल इंजन’ का लाभ, केंद्र से 44 हजार करोड़ की योजनागत राशि अटकी
राज्य सरकार के बजट प्रबंधन पर असर, कई प्रमुख योजनाओं पर पड़ा कामकाज का संकट
भोपाल। केंद्र और राज्य में एक ही दल की सरकार होने के बावजूद मध्य प्रदेश को इन दिनों ‘डबल इंजन’ का लाभ मिलता नजर नहीं आ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते वर्षों में प्रदेश की धरती से कई महत्वाकांक्षी योजनाओं की शुरुआत की थी, और केंद्र ने बजट में भी मध्य प्रदेश के लिए उदारता दिखाई थी। लेकिन मौजूदा वित्तीय वर्ष में हालात बदल गए हैं — केंद्र से मिलने वाली सहायता राशि का प्रवाह थम गया है।
केंद्रांश की रफ्तार धीमी, आधे साल में सिर्फ 18% फंड जारी
वित्तीय वर्ष 2025-26 में केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश के लिए विभिन्न योजनाओं के तहत 44,355 करोड़ रुपये का केंद्रांश निर्धारित किया है। इसके मुकाबले राज्यांश 24,263 करोड़ रुपये रखा गया। हालांकि, 1 अप्रैल से 7 अक्टूबर 2025 तक राज्य को केंद्र से सिर्फ 8,027 करोड़ रुपये ही प्राप्त हुए हैं — यानी मात्र 18.09 प्रतिशत। इसका सीधा असर विकास कार्यों पर पड़ रहा है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हाल ही में बजट की छमाही समीक्षा बैठक की, जिसमें वित्तीय स्थिति पर विभागवार रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। इस समीक्षा में सामने आया कि जल जीवन मिशन जैसी प्राथमिकता वाली योजनाओं के लिए केंद्र से कोई राशि प्राप्त नहीं हुई है। परिणामस्वरूप, राज्य सरकार को अपने ही बजट से खर्च का प्रबंधन करना पड़ रहा है, जिससे अन्य परियोजनाओं पर दबाव बढ़ गया है।
महत्वपूर्ण योजनाएं ठप — जल जीवन मिशन से लेकर पेंशन तक प्रभावित
आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार, कई प्रमुख योजनाएं अधर में हैं। उदाहरण के लिए—
जल जीवन मिशन: 8,561 करोड़ रुपये की अपेक्षित राशि नहीं मिली।
समग्र शिक्षा अभियान: 3,321 करोड़ में से केवल 1,460 करोड़ रुपये प्राप्त।
केंद्रीय सड़क निधि: 1,150 करोड़ में से 858 करोड़ ही जारी।
इंदिरा गांधी विधवा पेंशन: 400 करोड़ के विरुद्ध सिर्फ 92.28 करोड़।
इंदिरा गांधी वृद्धावस्था पेंशन: 1,152 करोड़ में से 197 करोड़।
मनरेगा: 3,160 करोड़ में से 533 करोड़।
प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण): 2,640 करोड़ में से 1,987 करोड़।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन: 2,652 करोड़ में से केवल 1,035 करोड़ रुपये प्राप्त हुए।
इसके अलावा निर्मल भारत अभियान, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, केन-बेतवा लिंक परियोजना, प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना, छात्रवृत्तियां, आयुष मिशन, और ग्राम स्वराज अभियान जैसी कई योजनाओं में अब तक कोई राशि जारी नहीं की गई है।
वित्त विभाग के अधिकारियों का कहना है कि केंद्र से जारी आंकड़ों में कुछ योजनाएं शामिल नहीं हैं क्योंकि भारत सरकार कई योजनाओं की धनराशि सीधे संबंधित खातों में स्थानांतरित करती है।
राज्य सरकार अब नवंबर-दिसंबर में होने वाले विधानसभा के शीतकालीन सत्र में द्वितीय अनुपूरक बजट पेश करने की तैयारी में है। इसके तहत विभागों पर कई वित्तीय प्रतिबंध लगाए गए हैं। अब विभाग बिना वित्त विभाग की पूर्व अनुमति के नए वाहन या अनावश्यक खरीद प्रस्ताव नहीं दे सकेंगे।
यदि भारत सरकार या किसी अन्य एजेंसी से किसी योजना के लिए सहायता स्वीकृत हो, तो भी अतिरिक्त संसाधन मौजूदा योजनाओं की बचत राशि से नहीं जुटाए जा सकेंगे। पूंजीगत सहायता वाली परियोजनाओं में भी अतिरिक्त बजट तभी स्वीकृत होगा जब केंद्र से अनुमति प्राप्त हो।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार की वित्तीय नीतियों और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर कहा कि जब केंद्र और राज्य में एक ही दल की सरकार है, तो फिर केंद्रांश की राशि मिलने में इतनी देरी क्यों हो रही है।
पटवारी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री आवास योजना, जल जीवन मिशन, पीएम ई-बस योजना, केन-बेतवा परियोजना, नगरीय विकास, और स्वास्थ्य केंद्रों से जुड़ी योजनाएं केंद्र से राशि नहीं मिलने के कारण प्रभावित हो रही हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि जल जीवन मिशन में भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते केंद्र ने राशि जारी करने पर रोक लगा दी है।
उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि भारत सरकार से लंबित फंड जारी करवाने के लिए ठोस पहल की जाए और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
मध्य प्रदेश को इस समय ‘डबल इंजन’ की ताकत का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। केंद्र से योजनागत धनराशि के अभाव में राज्य की कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं प्रभावित हो रही हैं। यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी, तो विकास कार्यों की रफ्तार पर गहरा असर पड़ सकता है।


