MP: सागर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में इस कंपनी के घोटाले की गूंज, वाहन चालको के गलत तरीके से कट रहें चालान

स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में टेक्नोसिस कंपनी के घोटाले की गूंज, वाहन चालको के गलत तरीके से कट रहें चालान

सागर। सागर स्मार्ट सिटी में बीते लंबे वक्त से अनियमितताओं की चर्चाएं सामने आती रही हैं।
सूत्र बताते हैं कि साल 2021 में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत टेक्नोसिस कंपनी ने 7.5 लाख रुपये की लागत से 4 कैमरे लगाए थे, लेकिन ये कैमरे आज तक चालू नहीं हुए, क्योंकि इन्हें केवल पैसे निकालने के उद्देश्य से लगाया गया था।

प्रोजेक्ट इंचार्ज ने संबंधित अधिकारियों से सांठगांठ करके अपना कमीशन लिया गया और फाइल पास करवा दी गयी भले ही सिस्टम जैसे-तैसे ही क्यों न लगाया गया हो। ओडीसी के नाम पर मीटर बॉक्स लगाकर जिसे बीएमएस गार्ड रूम के एंट्रेंस पर रखा गया, एक छोटा सा स्विच चालू करके इसे बीएमसी को हैंडओवर कर दिया गया।
सूत्र बताते हैं कि कैमरों की हालत इतनी खराब है कि वे सिर्फ दिखावे के लिए लटके हुए हैं। न पर्याप्त फाइबर इंस्टॉलेशन किया गया और न ही ऐसा कोई सर्वर लगाया गया जिसकी लागत इतनी अधिक हो। न तो ये कैमरे हेड काउंट करने की क्षमता रखते हैं और न ही ये पीटीजेड (पैन-टिल्ट-ज़ूम) कैमरे हैं, जिनकी कीमत इतनी ज्यादा हैं

चर्चा है कि टेक्नोसिस कंपनी ने सिर्फ अपना फायदा कमाया और प्रोजेक्ट इंचार्ज ने अपना कमीशन लेकर इसे मंजूरी दिला दी, जबकि लगाए गए कैमरे न तो उचित गुणवत्ता के हैं और न ही उपयोगी साबित हो रहें।

कंपनी में गैर-तकनीकी कर्मचारियों की भर्ती और वित्तीय अनियमितताएँ सामने आई

मिली जानकारी के अनुसार टेक्नोसिस कंपनी में कई ऐसे लोग कार्यरत हैं, जिनकी शैक्षणिक योग्यता और अनुभव तकनीकी क्षेत्र से संबंधित नहीं हैं, लेकिन फिर भी उन्हें महत्वपूर्ण तकनीकी पदों पर रखा गया है।

सलमान खान ( बीए पास)
तकनीकी पद पर काम।

राजनीकांत भोरे – बी.ई. नहीं होने के बावजूद प्रोजेक्ट मैनेजर के पद पर कार्यरत।

कुलदीप रजक – बी.कॉम करने के बावजूद तकनीकी पद पर नियुक्त, जबकि उनकी नियुक्ति व्यक्तिगत संबंधों के आधार पर हुई।

प्रमोद – गैर-तकनीकी पृष्ठभूमि के बावजूद तकनीकी कार्य कर रहे हैं।

भारत विश्वकर्मा – गैर-तकनीकी क्षेत्र से होने के बावजूद तकनीकी पोस्ट पर कार्यरत।

राधा पटेल – गैर-तकनीकी होते हुए भी तकनीकी पोस्ट पर कार्य।

गीतांजलि – बी.एस.सी. की डिग्री रखने के बावजूद तकनीकी काम में लगी हैं।

वित्तीय घोटाले और भ्रष्टाचार के आरोप

आईटीएमएस प्रणाली की विफलता: गलत नियुक्तियों के कारण तकनीकी समस्याएँ उत्पन्न हो रही हैं, जिससे इंटेलिजेंस ट्रैफिक सिस्टम (आईटीएमएस) असफल होता दिख रहा है।

चालान और सिग्नल की विफलता

आईटीएमएस को अच्छा दिखाने के लिए बिना हेलमेट बाइक चालको पर भारी संख्या में चालान काटे जा रहे हैं, जबकि कई जगहों पर सिग्नल खराब पड़े हैं।

अनावश्यक मेंटेनेंस शुल्क

हर क्वार्टर (3 माह) 8 लाख रुपये मेंटेनेंस के नाम पर लिए जा रहे हैं, जो संदिग्ध है।

सीसीटीवी सर्विलांस प्रोजेक्ट. कैमरों का सही ढंग से काम न करना

जानकार बताते हैं कि रात के समय अधिकतर कैमरे बंद रहते हैं, फिर भी इनका पूरा भुगतान किया जा रहा है।
नियमों के अनुसार, प्रोजेक्ट टीम में अलग-अलग विशेषज्ञ और प्रबंधक होने चाहिए, लेकिन यहाँ पहले से जुड़े कर्मियों ने ही पूरा कार्य किया।

अब तक प्रोजेक्ट मैनेजर, तकनीकी विशेषज्ञ ऑपरेटर या अन्य आवश्यक कर्मचारी नियुक्त नहीं किए गए हैं।आईटीएमएस (इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम) के गैर-तकनीकी कर्मचारी ही इस प्रोजेक्ट में काम कर रहे हैं।

आईटीएमएस फेज़-2 प्रोजेक्ट में देरी और अनियमितताएँ

2023 में फेज़-2 का टेंडर पास हुआ, जिसकी कुल अवधि 3 महीने थी, लेकिन यह तय समय में पूरा नहीं हो सका।

कैमरे और पोल दिसंबर 2024 और जनवरी 2025 में लगाए गए, जो निर्धारित समय-सीमा से काफी देरी से लगे।

प्रोजेक्ट की 2 साल की ऑपरेशन और मेंटेनेंस अवधि शुरू हो चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया है।

 वित्तीय अनियमितताओं की भनक!

अब तक प्रोजेक्ट की कुल कैपेक्स (पूंजीगत व्यय) का 90% भुगतान हो चुका है, जबकि कार्य काफी अधूरा है।

कोई भी दंड (पेनल्टी) नहीं लगाया गया, जबकि प्रोजेक्ट में भारी देरी हुई है।

इस प्रोजेक्ट में स्मार्ट सिटी में बड़े ओहदे पर बैठे अधिकारी पार्टनर बताये गए हैं इसलिए वे अपने लाभ को प्रभावित नहीं करना चाहते।

कर्मचारियों की नियुक्ति में देरी और गैर-तकनीकी लोगों की भर्ती

अब तक महत्वपूर्ण पदों पर कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं हुई है, जैसे

1 प्रोजेक्ट मैनेजर

1 इंटीग्रेटेड एक्सपर्ट

2 ऑपरेटर

कई कर्मचारियों ने रात में काम किया, लेकिन सही तकनीकी विशेषज्ञता के बिना परियोजना की गुणवत्ता पर असर पड़ा।

गजेंद्र ठाकुर✍️- 9302303212