सब्डिडी के ऐवज में घूस लेने पर 4 साल की सजा और जुर्माना

सब्डिडी के ऐवज में घूस लेने पर 4 साल की सजा और जुर्माना

सागर । सब्सिडी दिलाने की ऐवज में रिश्वत लेने वाले आरोपी राजसिंह को विशेष न्यायाधीश, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, सागर म.प्र आलोक मिश्रा की अदालत ने दोषी करार देते हुये भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की घारा-7 के अंतर्गत 04 वर्ष का सश्रम कारावास एवं दस हजार रूपये अर्थदण्ड की सजा से दंडित किया है। मामले की पैरवी प्रभारी उप-संचालक (अभियोजन) धर्मेन्द्र सिंह तारन के मार्गदर्षन में सहायक जिला अभियोजन अधिकारी लक्ष्मी प्रसाद कुर्मी ने की।

घटना संक्षिप्त में इस प्रकार है कि दिनांक 04.01.2021 को आवेदक शनि बागरी ने पुलिस अधीक्षक, लोकायुक्त कार्यालय सागर को सम्बोधित करते हुये एक लिखित शिकायत/आवेदन इस आशय का दिया कि उसने वर्ष 2019 में शासन की योजना के अंतर्गत कस्टम हायरिंग केंद्र की स्थापना हेतु कृषि यंत्र ट्रेेक्टर, ट्रॉली, भूसा मशीन, कल्टीवेटर आदि क्रय किये थे, जिसमें उसे शासन से 10,00,000/-रु. (दस लाख रुपये) की सब्सिडी मिलनी थी, जिसके लिए वह कृषि एवं यांत्रिकी विभाग सागर में पदस्थ अभियुक्त राजसिंह से मिला तो उसने सब्सिडी दिलाने के एवज् में 45,000/-रू. की मांग की, वह अभियुक्त को रिश्वत नहीं देना चाहता, बल्कि रंगे हाथों पकड़वाना चाहता है, अतः कार्यवाही की जाए। तत्कालीन पुलिस अधीक्षक, वि.पु.स्था. लोकायुक्त कार्यालय, सागर ने उक्त आवेदन पर अग्रिम कार्यवाही हेतु निरीक्षक बी.एम.द्विवेदी को अधिकृत किया। आवेदन में वर्णित तथ्यों के सत्यापन हेतु एक डिजीटल वॉयस रिकॉर्डर दिया गया इसके संचालन का तरीका बताया गया, अभियुक्त से रिश्वत मांग वार्ता रिकॉर्ड करने हेतु निर्देशित किया तत्पश्चात् आवेदक द्वारा मॉगवार्ता रिकार्ड की गई एवं अन्य तकनीकि कार्यवाहियॉ की गई एवं टेप कार्यवाही आयोजित की गई। टेप हेतु नियत दिनॉक को टेप दल लोकायुक्त कार्यालय सागर से रवाना हुआ एवं जहां आवेदक को रिश्वत लेनदेन वार्ता रिकॉर्ड करने हेतु वॉयस रिकार्डर देकर समझाईश देने के उपरांत रिश्वत लेनदेन हेतु भेजा गया और ट्रेपदल के सभी सदस्य नजरी लगाव रखते हुए आसपास अपनी उपस्थिति छिपाते हुए खड़े हो गये। अभियुक्त ने आवेदक से रिश्वत राशि 25,000/-रू. अपने हाथ में लेकर अपने पहने हुए लोवर की बांयी जेब में रख ली। कुछ देर बाद आवेदक ने निर्धारित इशारा किया तो ट्रेपदल के सदस्य प्रशिक्षण केंद्र परिसर में प्रवेश कर गये, अभियुक्त को घेरे में लेने के उपरांत निरीक्षक बी.एम.द्विवेदी ने अपना व टेªपदल का परिचय देकर अभियुक्त का परिचय प्राप्त करने के उपरांत, उससे रिश्वत राशि के संबंध में पूछा। मौके पर लिखा पढ़ी की उचित व्यवस्था न होने से अभियुक्त को उसी अवस्था में थाना लाया गया जहॉ रिष्वत राषि बरामदगी, घोल आदि की अग्रिम कार्यवाही की गई।उक्त आधार पर प्रकरण पंजीवद्ध कर मामला विवेचना में लिया गया । विवेचना के दौरान साक्षियों के कथन लेखबद्ध किये गये , घटना स्थल का नक्षा मौका तैयार किया गया उन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्रित कर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की घारा-7,का अपराध आरोपी के विरूद्ध दर्ज करते हुये विवेचना उपरांत चालान न्यायालय में पेष किया।

विचारण के दौरान अभियोजन द्वारा अभियोजन साक्षियों एवं संबंधित दस्तावेजों को प्रमाणित किया गया, अभियोजन ने अपना मामला संदेह से परे प्रमाणित किया । जहॉ विचारण उपरांत न्यायालय-विषेष न्यायाधीष भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, सागर आलोक मिश्रा की न्यायालय ने आरोपी को दोषी करार देते हुये उपरोक्त सजा से दंडित किया है ।

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