Saturday, January 31, 2026

रजिस्ट्री वापस करने की ऐवज में रिश्वत लेने वाले आरोपी को 03 वर्ष का सश्रम कारावास एवं दस हजार रूपये अर्थदण्ड

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रजिस्ट्री वापस करने की ऐवज में रिश्वत लेने वाले आरोपी को 03 वर्ष का सश्रम कारावास एवं दस हजार रूपये अर्थदण्ड

सागर । रजिस्ट्री वापस करने की ऐवज में रिष्वत लेने वाले आरोपी प्रवीण कुमार जैन को विशेष न्यायाधीश, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, सागर म.प्र श्री आलोक मिश्रा की अदालत ने दोषी करार देते हुये भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की घारा-7 के अंतर्गत 03 वर्ष का सश्रम कारावास एवं दस हजार रूपये अर्थदण्ड की सजा से दंडित किया है।मामले की पैरवी प्रभारी उप-संचालक (अभियोजन) श्री धर्मेन्द्र सिंह तारन के मार्गदर्षन में सहायक जिला अभियोजन अधिकारी श्री लक्ष्मी प्रसाद कुर्मी ने की।

घटना संक्षिप्त में इस प्रकार है कि दिनांक 06.06.2019 को आवेदक शैलेन्द्र दुबे ने पुलिस अधीक्षक, लोकायुक्त सागर को सम्बोधित करते हुये एक शिकायत/आवेदन इस आशय का दिया कि उसने अपने पिता के नाम से अलग-अलग तीन रजिस्ट्री/विक्रय-पत्र करवाई थी, जिनमें से रजिस्ट्रार (अभियुक्त प्रवीण) ने दो रजिस्ट्री उसे दीं व तीसरी रजिस्ट्री अपने कब्जे में रख ली, जिसे वापिस देने के ऐवज् में अभियुक्त प्रवीण द्वारा 3,500/-रु. (तीन हजार पांच सौ रुपये) रिश्वत राशि की मांग की जा रही है, वह रिश्वत नहीं देना चाहता है, बल्कि अभियुक्त को रंगे हाथों पकड़वाना चाहता है। अतः कार्यवाही की जाए। उक्त आवेदन पर अग्रिम कार्यवाही हेतु उप-पुलिस अधीक्षक राजेश खेड़े को अधिकृत किया। आवेदन में वर्णित तथ्यों के सत्यापन हेतु एक डिजीटल वॉयस रिकॉर्डर दिया गया इसके संचालन का तरीका बताया गया, अभियुक्त से रिश्वत मांग वार्ता रिकॉर्ड करने हेतु निर्देशित किया तत्पश्चात् आवेदक द्वारा मॉग वार्ता रिकार्ड की गई एवं अन्य तकनीकि कार्यवाहियॉ की गई एवं टेªप कार्यवाही आयोजित की गई । नियत दिनॉक को आवेदक द्वारा अभियुक्त को राषि दी गई व आवेदक का इषारा मिलने पर टेªपदल ने मौके पर पहुंचकर अभियुक्त को घेरे में लिया। रिश्वत राशि के बारे में पूछने पर रिश्वत राशि 3,000/-रु. अभियुक्त प्रवीण ने ऑफिस के चैम्बर में रखी टेबिल की ड्रॉज में रख देना बताया। उक्त आधार पर प्रकरण पंजीबद्ध कर मामला विवेचना में लिया गया।विवेचना के दौरान साक्षियों के कथन लेख किये गये, घटना स्थल का नक्षा मौका तैयार किया गया अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्रित कर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की घारा- 7,12, 13(1)(बी) सहपठित धारा 13(2) का अपराध आरोपी के विरूद्ध दर्ज करते हुये विवेचना उपरांत चालान न्यायालय में पेष किया।विचारण के दौरान अभियोजन द्वारा अभियोजन साक्षियों एवं संबंधित दस्तावेजों को प्रमाणित किया गया, अभियोजन ने अपना मामला संदेह से परे प्रमाणित किया । जहॉ विचारण उपरांत न्यायालय-विषेष न्यायाधीष भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, सागर श्री आलोक मिश्रा की न्यायालय ने आरोपी को दोषी करार देते हुये उपरोक्त सजा से दंडित किया है ।

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