सिद्धचक्र महामंडल विधान का आज होगा समापन

सागर। सुरखी नगर परिषद अंतर्गत आने वाले अतिशयकारी क्षेत्र श्री 1008 चंद्रप्रभु जिनालय में 108 मुनिश्री विश्र्वाक्ष सागर जी महाराज 105 क्षुल्लक श्री विगुण सागर जी महाराज 105 क्षुल्लक श्री विशमार्दव सागर जी महाराज ब्रह्मारिणी सुचि दीदी के सानिध्य में और जिनेन्द्र जैन ( गोटू) मोकलपुर के सहयोग से श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का आज समापन होगा जिसके पश्चात हवन होगा आपको बता दें कि 22 मार्च से इन संतों के सानिध्य में विधान का आयोजन चल रहा था जिसका आज हवन के साथ समापन होने जा रहा है।

इस विधान में अन्य शहरों के ही नहीं बल्कि अनेकों प्रांतों के लोग भी शामिल होने आये थे यहां विगुण सागर जी महाराज के पास दूर दूर से ऐंसे लोग भी आये जिनके मुश्किल से मुश्किल कार्य भी क्षुल्लक श्री विगुण सागर जी की प्रेरणा से विधान कराने पर संपन्न हो गये और कार्य संपन्न होने पर महराज जी का आभार प्रकट करने और आशीर्वाद लेने आये थे वहीं मंगलवार को ऐंसे लोग भी विधान में लाल धोती दुपट्टा पहनकर शामिल हुये जिनके शादी विवाह और मांगलिक कार्यों में बाधा आ रही थी

सातों दिन सात विधान
क्षुल्लक श्री विगुण सागर जी महाराज ने बताया कि कैसे सपताह के अलग अलग दिनों में कौन सा विधान करने से कौन कौन सी समस्याओं से मुक्ति मिलती
सोमवार श्री चंद्रप्रभु और श्री आदिनाथ विधान – इस विधान को करने से मनोकामना पूरी होने के साथ साथ मन को शांति मिलती है
मंगलवार – श्री वांसुपूज्य विधान, इस विधान के करने से ऐंसे लोग जिनके शादी विवाह और मांगलिक कार्य बर्षो से नहीं हो रहे हों वह पूरे हो जाते हैं
बुधवार – महामृत्युंजय विधान , इस विधान के करने से आसाध्य रोगों से मुक्ति मिलती है
गुरुवार – महावीर विधान ,इस विधान के करने से कमजोर मन वाले को आत्मबल बढने के साथ साथ कार्यों में सफलता मिलती है
शुक्रवार – पुष्पदंत विधान ,इस विधान के करने से देवी देवता के कोप और प्रेत बाधाओं से मुक्ति मिलती है
शनिवार – मुनिसुब्रत नाथ विधान , इस विधान के करने से शनिदोष से मुक्ति मिलती है
रविवार – कल्याण मंदिर विधान , इस विधान के करने से कालसर्प दोष पितृदोष और ग्रह नक्षत्र दोषों का निवारण होता है
22 मार्च से चल रहे श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के दौरान अनेकों जगह जैसे लखनऊ बैतूल जबलपुर पाटन अमरपाटन महाराजपुर गौरझामर सागर आदि जगहों से भी ऐंसे लोग महाराज श्री से आशीर्वाद प्राप्त करने पहुंचे जिनके काम महराज श्री के आशीर्वाद से संपन्न हो चुके थे

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