Sunday, January 11, 2026

गरीबी रेखा का राशनकार्ड बनाने बाबू ने ली थी रिश्वत, 4 साल जेल में चक्की पीसेगा

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बी.पी.एल. कार्ड बनाने हेतु रिश्वत लेने वाले बाबू को कठोर कारावास

सागर। न्यायालय आलोक मिश्रा विशेष न्यायालय, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम सागर के न्यायालय ने रिश्वत मांगने व रिश्वत लेने वाले तहसील कार्यालय रहली के अभियुक्त बाबू महेन्द्र खरे को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत 04 वर्ष का सश्रम कारावास एवं रू.10000/- अर्थदण्ड एवं धारा 13(1)(डी) सहपठित धारा 13(2) में 04 वर्ष का सश्रम कारावास एवं रू.10000/- के अर्थदण्ड से दंडित किया गया है। राज्य शासन की ओर से पैरवी विशेष लोक अभियोजक विपुस्था लोकायुक्त सागर रामकुमार पटेल के द्वारा की गई।
घटना का संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है कि दिनांक-08.10.2015 को आवेदक साहब सिंह ने पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त कार्यालय सागर को एक लिखित शिकायत आवेदन प्रस्तुत किया कि उसका तथा उसके मामा के लड़के धीरज सिंह व रामदास के बी.पी.एल. कार्ड बनवाने के लिए ग्राम पंचायत तिखी से फाईल तैयार करवाकर तहसील कार्यालय रहली में करीब तीन माह पहले जमा की थी, बाद में तहसील कार्यालय रहली के बाबू महेन्द्र खरे से मिला तो सभी से 1500-1500 रूपये ले लिये, बाद में दिनांक-06.10.2015 को जब आवेदक बाबू महेन्द्र खरे से मिला तो उसने 3000-3000 रूपये और रिश्वत की मांग की, वह बाबू महेन्द्र खरे को रिश्वत नहीं देना चाहता बल्कि रंगे हाथों पकड़वाना चाहता है।

शिकायत किये जाने पर शिकायत का सत्यापन कराया गया। आरोपी बाबू महेन्द्र खरे के द्वारा आवेदक से रिश्वत राशि की मांग की जाना और रिश्वत राशि लेने के लिए सहमत पाये जाने पर धारा 7 भ्रष्टाचार अधिनियम का अपराध पंजीबद्ध किया गया और टेªप आयोजित किया गया। ट्रेप दिनांक-10.10.2015 को आरोपी बाबू महेन्द्र खरे ने आवेदक साहब सिंह से 1000 रूपये की रिश्वत राशि ग्रहण की। तत्पश्चात् आरोपी महेन्द्र खरे को रंगे हाथ पकड़ा गया। आरोपी बाबू महेन्द्र खरे की आवाज के नमूने लिये जाकर रिश्वत मांग वार्ता में दर्ज आवाज से उसका मिलान कराया गया जो मिलान होना सही पाया गया। विवेचना के दौरान भ्रष्टाचार अधिनियम धारा 12, 13(1)(डी) सहपठित धारा 13(2) का इजाफा किया गया

संपूर्ण विवेचना उपरांत अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। आरोपी के द्वारा विचारण की मांग किये जाने पर माननीय न्यायालय में विचारण प्रारंभ किया गया। विचारण दौरान अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य तथा अभियोजक द्वारा किये गये तर्कों से सहमत होते हुए विद्वान न्यायाधीश महोदय ने आरोपीगण के विरूद्ध संदेह से परे मामला प्रमाणित पाया। फलतः आरोपी को कठोर कारावास से दंडित किया गया।

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