Monday, January 12, 2026

विदिशा से आईं समूह की महिलाओं ने सीखा श्रीविधि का पाठ

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विदिशा से आईं समूह की महिलाओं ने सीखा श्रीविधि का पाठ

सागर

सागर जिले में विकासखण्ड जैसीनगर, देवरी, केसली, रहली में धान की खेती की आधुनिक तकनीकी श्रीविधि के प्रदर्शन प्लॉट समूह की महिलाओं के द्वारा बनाये जा रहे हैं इस विधि में दो से तीन किलो प्रति एकड़ बीज दर पर्याप्त होती है। केसली विकासखण्ड के ग्राम ऊंटकटा में विदिशा जिले की महिलाओं का दल धान की इस तकनीक को देखने के लिए इस दल ने यहां लगाये गये धान के नर्सरी पौधों का अवलोकन किया। उन्होंने मास्टर सीआरपी और हितग्राही से अपनी शंकाओं पर चर्चा की। भरत रूहिल्ला सहायक जिला प्रबंधक, विदिशा के नेतृत्व में आये इस दल ने धान की खेती इस तकनीकी के बारे में विस्तार पूर्वक जाना। श्रीविधि के बारे में अनूप तिवारी, जिला प्रबंधक कृषि ने शैक्षणिक भ्रमण पर आये इस दल को प्रेशक्षित किया उन्होंने बताया कि इस विधि में 3ग्10 फीट के नर्सरी बैड बनाकर प्रत्येक बैड में एक-एक किलो बीज का रोपा तैयार किया गया हैं। 15 दिन से कम अवधि पर इन पौधों को 25-25 सेंटीमीटर की दूरी पर धान के खेतों में रोपा जायेगा। पैदावार को बढ़ाने के लिए प्रति एकड़ दो किलो मान से रोपाई के पश्चात नील हरित शैवाल (बीजेए) को भी डाला जायेगा। बीजेए वातावरणीय नाइट्रोजन को सोखकर पौधे को उपलब्ध कराता है। साथ ही खरपतवार को पनपने नहीं देता है व नमी को बचाये रखता है। धान के किसान बीजेए के इस्तेमाल से अपने खेतों की उर्वरा शक्ति को भी सुधार सकते हैंं। दूरी पर लगाये इन पौधों को नर्सरी से निकालकर उनकी जड़ों को धोना नहीं है और प्रत्येक पौधे को लिटाने की बजाये सीधा गाड़ना है। इस दल ने ग्राफटेड प्रजाति को लंगडा, चौसा, दशहरी आमों को भी देखा हैं ज्ञातव्य है कि जिले में अंकुर अभियान के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में छायादार और फलदार पौधरोपण कराया जा रहा है। जिले के श्रीविधि के किसान अब सोयाबीन की मार से परेशान किसानों के लिए खेती की एकनई तकनीकी से जोड़े जाने के लिए रॉल मॉडल बनेंगे।

हरीश दुबे जिला परियोजना प्रबंधक ने बताया कि धान के किसानों को सुगंधित धान की खेती करने के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है ताकि वे बाजार में अपने उत्पाद को बैचकर ज्यादा लाभ कमा सकें।

डॉ. इच्छित गढ़पाले, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत का कहना है कि लोगों को कृषि के क्षेत्र में कम लागत तकनीकी से जोड़ते हुए लाभकारी फसलों की खेती से जोड़े जाने का प्रयास किया जा रहा है।

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