मेरी नजर से ✍

  • जीवन की कोई निश्चित परिभाषा नहीं है । कायरों ने इसे परेशानियों से भरा महासागर करार दिया है, तो वीरों ने इसे अवसरों का खजाना कहा है, संतों ने इसे मोक्ष का मार्ग कहा है, तो सांसारिकों ने इसे भोग का अवसर बताया है, विद्वानों को यह अनुभव का खजाना है, तो मूर्खों को मनमानी का स्थान लगा है.
    पर इनमें से कोई भी जीवन की निश्चित परिभाषा नहीं कही जा सकती है. हर परिस्थिति हर स्थान पर इसकी अलग परिभाषा व्यक्त हुयी है.
    मेरी दृष्टि से देखा जाए तो जीवन उस महान अवसर का नाम है जो एक इंसान को सिर्फ एक बार प्राप्त होता है वो भी निश्चित समयावधि के लिए है. वो चाहे तो ऐसे कर्म कर सकता है कि आने वाली समस्त पीढिया उसे याद रखे… या वो यूँ ही इस अवसर को गँवा सकता है
    सबसे महत्वपूर्ण तथ्य हैं, “भावना” मानव जाति को कुछ सार्थक देने की ‘भावना’ .. जब इंसान के भीतर इस ‘भावना’ की ज्योति प्रज्जवलित हो जाती है तो वो कुछ ऐसा कर गुजरता है कि .. संसार उसे सिर आँखों पर बिठा लेता है !

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